सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

सर्दियों में मुहँ से सांस के साथ धुंआ निकलता है वो क्या है? Why Breath Visible in Winter?

breath  सर्दियों में मुहँ से सांस के साथ धुंआ सा क्यों निकलता है ये बात  अक्सर पूछते है बच्चें,
ऐसा क्यूँ होता है?
   ये मुहँ से निकलने वाला धुंआ क्या होता है?   
   जब हमारी सांस लेने  की क्रिया में वायु फेफड़ों द्वारा बहार निकाली   जाती है तो उस में जो जलवाष्पे water vapours होती है |
   आओ पहले ये जाने कि ये जल वाष्पे सांस में कहाँ से आती है
   श्वशन क्रिया के दौरान शरीर में CO2 कार्बनडाईऑक्साइड और पानी H2O बनते है यही पानी जलवाष्प के रूप में फेफड़ों द्वारा वाष्पन के द्वारा मुहँ या नाक से बहार निकाल दी  जाती है
श्वशन/पाचन के दौरान बनने वाला जल और हमारे द्वारा पीया गया जल भी मूत्र,पसीना,वाष्पीकरण द्वारा ही बाहर आता है|
अब देखें इसकी रासायनिक समीकरण,
Glucose + Oxygen = Carbon Dioxide + Water + Energy
C6H12O6+ 6O2=6CO2+ 6H2O + Energy
आओ अब जाने आगे
सर्दियों में शरीर से बहार यानी कि वायु मंडल का तापमान बहुत कम होता है जैसे ही यह जलवाष्प सांस के साथ बाहर आती है तुरंत ही संघनित Condense कर पानी की छोटी छोटी बूंदों Water Dropletes में बदल जाती है और दिखाई देने लगती है जिसे धुंआ सा कहा जाता है|
यह क्रिया हर समय हर मौसम में चलती है तो फिर गर्मियों में क्यूँ नहीं दिखाई देती है यह धुंआ?
गर्मियों में बहार का तापमान अधिक होने के कारण ये जलवाष्प संघनित Condense नहीं होने पाती है और जल्दी से पुन्ह वाष्पीकरण हो जाता है |
छोटे बच्चे अक्सर गावं में मजाक करते है देखो मै बीडी पी रहा हूँ इस धुवें को दिखा कर |  



 

मंगलवार, 25 जनवरी 2011

जुगनू कैसे चमकता है ? How Firefly shines ?

जुगनू कैसे चमकता है ? How Firefly shines ?

jugnu प्रकृति में बहुत से जीव और वनस्पतियां स्व प्रकाश उत्पन्न करते है जीव जो  प्रकाश (पीला, हरा, लाल) उत्पन्न करते है उसको जीवदीप्ति (Bio-luminescence) कहते है जीवदीप्ति बिना गर्मी का प्रकाश होता है ये प्रकाश शीतल होता है

जीवों में मुख्यतः कुछ मोल्स्कन,स्पंज,जेली फिश,केकड़े व कुछ जाति

की मछलियाँ,lightning bugs प्रकाश उत्पन्न करते है|

पहले तक यह माना जाता रहा कि जीव फास्फोरस के कारण चमकते है लेकिन बाद में पता चल गया कि फास्फोरस के कारण ऐसा नहीं होता है|

सन् 1794 में इटैलियन वैज्ञानिक स्पेलेंज़ानी ने सिद्ध किया कि जीवों में प्रकाश उनके शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं के कारण होता है ये रासायनिक क्रियाएँ मुख्यत पाचन से सम्बन्धित होती है|

यह फोटोजेन  या ल्युसिफेरिन  रसायन होता है|

इन रासायनिक क्रियाओं के कारण मुख्यत दो पदार्थ बनते है|

ल्यूसिफेरिन और ल्युसिफेरेस

आक्सीकरण क्रिया के फलस्वरूप ल्यूसिफेरिन नामक प्रोटीन आक्सीकृत हो कर चमक उत्पन्न करती है |

जुगनू दो प्रकार के होते है,

1. लैपरिड

2. क्लिक बीटल

ऐसी क्या जरूरत पडी कि जुगनू या अन्य जीवों के अंदर चमकने जैसी क्रिया विकसित हुई?

अभी सही सही नहीं पता है,

यह चमक जुगनूओं को अपना आहार बनाने और आहार बनने से बचने दोनों काम आता है नर मादा जोड़ा बनाने यानी मेंटीग के लिए आकर्षण उत्पन्न करते है या दूसरे जानवरों का शिकार करने के लिये इसका उपयोग करते हैं बार बार एक निश्चित अंतराल के बाद उत्पन्न लाईट फ्लश परभक्षियों को भ्रमित करती है ये ही सब चमकने के उपयोग है|

वैज्ञानिक जुगनुओं की इस विशेष प्रोटीन से काफी नए शोध की उम्मीदे लगाएं बैठे है वैज्ञानिकों ने fireflies की चमकने वाली  प्रोटीन का इस्तेमाल कैंसर, autoimmune रोग और कई अन्य बीमारियों का इलाज की दवाओं के लिए किया है|

देखते है कवियों,साहित्यकारों और  नग्मानिगारों को कितने ही ख्याल देने वाला जुगनू वैज्ञानिकों को क्या देता है|

शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

कैसे बनती है आईसक्रीम What's in the Icecream ?

कैसे बनती है आईसक्रीम What's in the Icecream ?
कौन  होगा जिस ने आईसक्रीम ना खाई हो और देख देख के लार ना बहाई हो यह वो खाद्य है जो बच्चों किशोरों बड़ों सब में लोकप्रिय है उन सब का पसंदीदा है आज ये जाना जाएगा कैसे बनती है यह लज़ीज़  आईसक्रीम ?
परंतु क्या आईसक्रीम सचमुच ताज़ा दूध,मक्खन,मलाई,फलों आदि से ही बनती हैं? नहीं?

आइसक्रीम बनाने के लिए आवश्यक सामग्री: वनस्पती घी या हाइड्रोजिनेटेड सस्ते तेल,मिल्क पाऊडर,उच्च फ्रक्टोज युक्त मक्का की चाशनी,आटीफेशियल स्वीटनर जैसे सक्रीन या एस्पार्टेम और जहरीले संयोजक जैसे कार्बोक्सीमिथाइल सेल्यूलोज, ब्यूटिरेल्डीहाइड, एमाइल एसीटेट आदि 
डाईइथाइल ग्लाइकोल का प्रयोग अंडे के विकल्प के रूप में होता है और वायु  आकार बड़ा करने के लिए 
                                                      Polysorbate 80 का उपयोग किया जाता है  
Polysorbate 80 is an emulsifying agent, often used in ice cream to prevent milk proteins from completely coating the fat droplets. This allows them to join together in chains and nets, to hold air in the mixture, and provide a firmer texture, holding its shape as the ice cream melts.
Similar compounds are polysorbate 60, polysorbate 65, etc. 

Lecithin का उपयोग किया जाता है


Lecithin is widely used as an emulsifying agent, allowing oil and water to mix, as in mayonnaise. It is used in ice creams, salad dressings, cosmetics, and it is the main ingredient in non-stick spray coatings for cooking.
Lecithin is also an anti-oxidant, helping to keep fats from going rancid (going rancid itself in the process, however).
Lecithin is often taken as a dietary supplement, since it contains the B vitamin choline.Lecithin is the emulsifier in egg yolks that allows the oil and water to mix to make mayonnaise.

                                               Glycerol monostearate का उपयोग किया जाता है

Mono-glycerides are used as emulsifying agents in many products, such as baked goods, whipped cream, and ice cream.It is a fat that is missing two of its fatty acids. It is often used with di-glycerides, which are fats that are only missing one of their fatty acids.

       Sodium citrate का उपयोग किया जाता है

Sodium citrate is used in ice cream to keep the fat globules from sticking together. Citrates and phosphates both have this property.It is also an anti-coagulant.As a sequestering agent, sodium citrate attaches to calcium ions in water, keeping them from interfering with detergents and soaps.
फ्लेवर बनाने के लिए प्रयुक्त रसायन: चैरी फ्लेवर बनाने के लिए एल्डीहाइड सी-17,पिपरोनाल नामक रसायन वनीला फ्लेवर के लिए,पाईंन एप्पल स्वाद के लिए इथाइल एसीटेट का प्रयोग किया जाता है|
रंग बिरंगे रंग देने के लिए कृत्रिम रंजक रसायन
आपने देखा कि आईसक्रीम बनाने के लिए कितने रसायनों का प्रयोग किया जाता है इस् लिए आईसक्रीम को यदि कैमिकल बम्ब कहा जाए तो सही होगा|       

मंगलवार, 30 नवंबर 2010

विधुत बल्ब का फिलामेंट क्यूँ नहीं जलता ? Why does not the electric Filament in an electric bulb burn up ?

विधुत बल्ब का फिलामेंट क्यूँ नहीं जलता ?
  विधुत बल्ब में एक स्प्रिंग की तरह की तार होती है जो की लाल तप्त हो जाती है और तब प्रकाश उत्पन्न  होता है यह फिलामेंट कहलाता है वैसे  विधुत बल्ब को बोलचाल की भाषा में बल्ब कह देते है इसका नाम उद्दीप्त दीपक या इन्कैंडिसेंट लैम्प (incandescent lamp) होता है |
जब  इस फिलामेंट तार में विधुत प्रवाहित होती है तो तब यह गरम होकर प्रकश देने लगता है। 
फिलामेंट बनने के लिए उच्च गलनांक वाली धातु की आवश्यकता होती है |
यदि कम गलनांक वाली धातु का प्रयोग कर लिया जाए तो वो पिंघल जाएगी 
टंग्स्टन Tungsten धातु का प्रयोग किया जाता है ,जिसका गलनांक 3140 डीग्री सेंटीग्रेट होता है और जबकि फिलामेंट को चमकने के लिए 2700 डीग्री सेंटीग्रेट तापमान की जरूरत होती है |
फिलामेन्ट को काँच के बल्ब के अन्दर इसलिये रखा जाता है ताकि अतितप्त फिलामेन्ट तक वायुमण्डलीय आक्सीजन न पहुँच पाये और इस तरह क्रिया करके फिलामेन्ट को जला ना सके।
  1. Outline of Glass bulb
  2. Low pressure inert gas (argon, neon, nitrogen)
  3. Tungsten filament
  4. Contact wire (goes out of stem)
  5. Contact wire (goes into stem)
  6. Support wires
  7. Stem (glass mount)
  8. Contact wire (goes out of stem)
  9. Cap (sleeve)
  10. Insulation  
  11. Electrical contact
आओ जाने विधुत बल्ब  के आविष्कार का  इतिहास
पहला बिजली का बल्ब 1800ई में हम्फ्री डेवी एक अंग्रेजी वैज्ञानिक द्वारा बनाया गया था. उन्होंने बिजली के साथ प्रयोग किया और एक बिजली बैटरी का आविष्कार किया. जब उन्होंने अपनी बैटरी के साथ कार्बन का एक टुकड़ा  तार के साथ जोड़ा,कार्बन का टुकड़ा चमकने लगा और प्रकाश उत्पन्न हुआ,इसको बिजली का  आर्क कहा जाने लगा |
बाद में 1860 में,अंग्रेजी भौतिक विज्ञानी सर जोसेफ विल्सन हंस (1828-1914) ने एक व्यावहारिक, लंबे समय तक चलने वाले बिजली की रोशनी का बल्ब बनाने का प्रदर्शन किया,उन्होंने पाया कि एक कार्बन रेशा पेपर अच्छी तरह से काम करेगा लेकिन वह चमकने के साथ जल्दी से जल गया| 
1877 में अमेरिकी चार्ल्स फ्रांसिस ब्रश दवारा निर्मित कुछ कार्बन प्रकाश आर्क्स का कुछ सड़कों पर प्रकाश उत्तपन करने के लिए इस्तेमाल किया गया,कुछ बड़े कार्यालय भवनों में और कुछ दुकानों में प्रयोग किया गया परन्तु इस बिजली की रोशनी का लाभ केवल कुछ लोगों को ही हो सका | 
1879 में आविष्कारक थॉमस अल्वा एडीसन (यूएसए) ने  पता चलाया  कि एक ऑक्सीजन मुक्त ग्लास बल्ब में कार्बन फिलामेंट को प्रकाशित किया जाए,परन्तु वह बल्ब भी 40 घंटे के लिए ही  जला था, एडीसन ने अंततः एक बल्ब का उत्पादन किया जो  1500 से अधिक घंटे के लिए चमक सकता था
1910 में विलियम डेविड कूलिज (1873-1975) एक टंगस्टन फिलामेंट जो भी पुराने फिलामेंटस से अधिक समय तक तप्त रह के प्रकाश दे सकता था का आविष्कार किया और शुरू हुआ गरमागरम बल्ब दुनिया में क्रान्तिकारी परिवर्तन |
चित्र  हिंदी विकी से साभार

बुधवार, 24 नवंबर 2010

क्या होती चेयुइंगम ? What is Chewing Gum?

क्या होती चेयुइंगम ? What is Chewing Gum?
बचपन में किसी से सुना था की चेयुइंगम पशु चर्बी से बनती है परन्तु ये सच नहीं है |
तो फिर होती क्या है चेयुइंगम ?
चेयुइंगम  संयोगवश खोजी  गयी  है वो कैसे उन्नसवी सदी के 1869 ई. में रबर के नए नए विकल्पों की खोज तेज़ी से की जा रही थी तभी थामस एडम्स नामक व्यवसायी सापोडीला(Manilkara zapota,  Sapodilla) चीकू फल के  पेड़ की गोंद को मुंह में डाल कर चबाया तो उन्हें यह गोंद बहुत ही स्वादिष्ट लगी और उन्होंने विचार किया क्यों न इसको और लोगो तक भी पहुंचाया जाए बस उन्होंने इस गोंद (गम) का पेटेंट(1871) करवाया और 'एडम्स न्युयोर्क गम' गम के नाम से मार्केट में उतरा और बेचना शुरू कर दिया |
इसका चिपचिपा और लिसलिसा सा स्वाद सब को अच्छा लगा,मिठास होने और चबाते ही चले जाने के कारण यह छोटे बड़े सब में बहुत लोकप्रिय हुई | चीकू फल के पेड़ के तने के साथ एक वक्राकार कट बनाने से तने के  अंदर से गाढ़ा सफेद रस निकलता है जिसे छोटे बैग में एकत्र करते हैं कारखाने में इस रस को कॉर्न सिरप, ग्लिसरीन, चीनी फ़ूड कलर और स्वादिष्ट बनाने का मसाला के साथ उबला जाता है तो यह मिक्सचर सूख जाता है इसको फैला कर मनचाहे  आकार के टुकड़ों में काट कर चेयुइंगम बन जाती है|
बाद में इस सापोडीला चेयुइंगम  में बहुत सुधार हुए,डा. सी मैंन ने इस में पैपासीन नाम का एक सुगन्धित  पदार्थ मिला कर इसको बाजार का राजा बना दिया सुगन्धित  पैपासीन युक्त सापोडीला चेयुइंगम ने कीं सालों तक बाज़ार में राज़ किया |
सापोडीला के राज़ के बाद अब चेयुइंगम गुडा सिपैक प्रजाति के पेडों के गोंद  से बनते है       

शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

कितने प्रकार का होता है भय ? Types of Phobia

वैसे तो भय कई प्रकार का होता है पर यहाँ पहली किस्त में मुख्य 10 प्रकार पहले प्रस्तुत है|
1.मकड़ियों का विकृत भय (Arachnophobia):
arachnophobia भय की इस प्रकार में मकड़ियों से डर लगता है यहाँ तक की मकड़ियों के चित्र देख कर भी डर लगता है ये लगता रहता है उसके कपडो में या फिर उसके आसपास मकड़ी है






2.समाज का भय (Social Phobia ):
social anxiety
इस प्रकार के भय में व्यक्ति को समाज और लोगो से डर लगा रहता है उदाहरण के तौर पर एक विद्यार्थी पहले दिन कक्षा में नहीं जाता की प्रोफेसर जी उस को सब के सामने अपना परिचय देने को कहेगे|social anxiety occurring only in specific situations, such as a fear of public speaking.

 



3.उड़ान का भय (Aerophobia):
air इस प्रकार के भय में उड़ान ,हवाई ज़हाज़ का सफर आदि स्तिथीयां आती है Aerophobia is a term used to describe an irrational fear of breezes, fresh air, flying or any association with flights and flying.   



 


4.एक सीमित स्थान में बंद किये जाने का भय (Claustrophobia):
Claustrophobia
इसमें ये डर लगा रहता है कि वो एक सिमित जगह पर बंद है या बंद जगहों पर जाने से डर जाता है जैसे लिफ्ट या फिर स्केन मशीनों में जाने का भय 
Claustrophobia is an anxiety disorder in which someone has an intense and irrational fear of confined or enclosed spaces.





5.ऊँचाईयों से भय (Acrophobia):
fear of high
 ऊँची जगहों पर जाने का डर  An abnormal fear of high places.





  


6.उलटी आ जाने का भय (Emetophobia):
emetophobia
इसमें ये भय रहता है की उसको बदबू से सफर में या कही जाने से उलटी आ जाएगी Emetophobia is an intense, irrational fear or anxiety pertaining to vomiting.







7.भीड़ या खाली जगहों का भय (Agoraphobia):
Agoraphobia
अधिक भीड़ वाली जगह या फिर सुनसान जगह पर जाने का भय,a morbid fear of open spaces (as fear of being caught alone in some public place).



   


8.कैंसर हो जाने का डर (Carcinophobia):
carcinophobia
सदा ये डर बना रहता है की उसको कैंसर है या हो जाएगा Carcinophobia, the fear of cancer, is among the most widespread phobias, and it is not hard to imagine why.



 



9.बवंडर,तड़ित का भय  (Brontophobia):

Brontophobia
इस प्रकार में सदा बवंडर,तड़ित का डर बना रहता है वर्ष में जाने से भी डर लगता है Brontophobia is better known as fear of lightning and thunder.




  



10.मर जाने का भय (Necrophobia):
Necrophobia
जबकि पता है की सब ने एक दिन मर जाना है फिर भी हर समय ये भय लगा रहना की की मै मरने वाला हूँ या मर जाऊँगा,मृत को देखने का डर Necrophobia, is also known as Fear of Death and Fear of Dead Things. It is a surprisingly common phobia.






सभी चित्र गूगल इमेज से लिए गए है| 

मंगलवार, 16 नवंबर 2010

क्या मछलियाँ भी सूँघ सकती है? Can fish smell?

जैसे हम गंध को नाक से सूंघ लेते है क्या मछलियाँ भी सूँघ सकती है?
ये प्रश्न अक्सर सोचने पर मजबूर कर देता होगा मछलियाँ तो पानी के अंदर रहती है और गिल्ज़(गल्फडो) से सांस लेती है और पानी में तो हवा भी नहीं चल रही होती फिर मछलियाँ पानी के भीतर गंध का अनुभव कैसे कर लेती होंगी?
इस प्रश्न जानने के लिए पहले ये जानना जरूरी है कि मछली की शारीरिक बनावट कैसी होती है और क्या उस की नाक भी होती है?
nostrils-1
 nostrils मछली के नथुने होते है  मछली की नाक ऊपर सिर पर दो  खुलने वाले नथुने से बनी है प्रत्येक नथुने में छिद्र होते है दो जोड़ी नथुने के बीच में एक फ्लैप होता है जो इन छिद्रों को अलग अलग करता है वैसे अलग अलग प्रजाति की अलग अलग बनावट होती है यानी अंतर,नाक के भीतर अनगिनत कोशिकाएं होती है पानी एक नथुने से भीतर जाता है और इन कोशिकाओं को छूता है इन कोशिकाओं के संवेदी रिसेप्टर्स गंध को पहचान कर मस्तिष्क को सूचना प्रदान करते है|
यहाँ एक बात काबिले गौर है कि मछली के नथुने यानी नाक उसके श्वशन तन्त्र Respiratory System के हिस्से नहीं है|मछली का श्वशन तन्त्र  भी जटिल व्यवस्था है चलो जान ही लेते है ये भी
fish_system  पानी मुख से अंदर जाता है और गिल्ज़ से होता हुआ बाहर आ जाता है gills_2     
गिल्ज़ में पानी में घुलनशील आक्सीजन पतली झीळली वाली रक्त नलिकाओं में से रक्त के साथ जा मिलती है और ह्रदय की कार्य प्रणाली से सारे शरीर में पहुँच जाता है |                                             gills  
मछलियों को सूघने के लाभ:  
1- इनको भोजन की तलाश में मदद मिलती है|
2- इस से इनको खतरे भापने में मदद मिलती है |
3- इनको अपने आश्रय या कह लो घर तक पहुचने में मदद मिलती है |
4- ये इस गुण से दो पानियों का अंतर तक पहचान जाती है |
5- खतरे की चेतावनी देने के काम भी आता है यह गुण|
नोट :सभी चित्र गूगल इमेज से साभार