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शनिवार, 30 अप्रैल 2011

क्या है अस्थानिक गर्भ ? Ectopic pregnancy ?

क्या है अस्थानिक गर्भ ? Ectopic pregnancy ?
जो गर्भ अपने स्थान से हट कर अन्य कहीं स्थापित होता है उस को अस्थानिक गर्भ कहते है वैसे गर्भ की निश्चित जगह तो गर्भाशय यानी यूटरस है परन्तु कईं बार गर्भ इस के आलावा भी कहीं और ठहर जाता है आओ जाने इस बारे में,
नर जनन कोशिका शुक्राणु का मादा जनन कोशिका अंडाणु से मिलन निषेचन कहलाता है निषेचन क्रिया डिम्ब वाहिनी फेलोपियन ट्यूब में संपन्न होती है फिर यह निषेचित अंड फिर गर्भाशय में स्थापित हो कर वृद्धि को प्राप्त होता है परन्तु यदि कभी कभी गर्भावस्था की प्रारम्भिक दिक्कतों के कारण गर्भाधारण के बाद निषेचित अंड गर्भाशय तक नहीं पहुँच पता और डिम्ब वाहिनी में ही अटक जाता है |
An ectopic pregnancy is one in which the fertilized egg implants in tissue outside of the uterus and the placenta and fetus begin to develop there. it's also commonly referred to as a tubular pregnancy, but the egg can plant itself in the cervix, ovaries, and the abdomen. 
बहुत कम ऐसा भी होता है कि निषेचन  अंडाशय  ओवरी  में भी हो जाता है |
और कम ही ऐसा भी  होता है कि निषेचन डिम्बवाहिनी के बहार या मुहाने पर हो जाता है |
 फेलोपियन ट्यूब से बाहर निषेचन या निषेचित अंड का फेलोपियन ट्यूब से बाहर  अंडाशय की तरफ मूव कर जाना उदर गुहा गर्भधारण कहलाता है उदर गुहा में ही निषेचित अंड का रोपण हो जाता है और यहीं पर ही उस को रक्त आपूर्ती होने लगती है और भ्रूण विकसित होने लगता है इसप्रकार के गर्भ प्राय रुकते नहीं है परन्तु कईं बार कम स्तिथियों में ही गर्भ का पूरा विकास भी हो जाता है इस प्रकार की सारी गर्भावस्थाओं को अस्थानिक(स्थान से हट कर) गर्भावस्था कहते हैं |  
कुछ अन्य सम्भावित अस्थानिक गर्भ की स्तिथियाँ 

    क्या कारण हो सकते हैं अस्थानिक गर्भधारण के ?
फेलोपियन ट्यूब में रुकावट 
गर्भाशयी संक्रमण 
फेलोपियन  ट्यूबों में संरचनात्मक विकार 
पूर्व सीजेरियन विकार (यानी पहले कभी यदि शल्य चिकत्सा करवाई गयी हो तो कुछ विकार उत्पन्न/रह जाते है ) 
पूर्व अस्थानिक गर्भ की पृष्ठभूमि
असफल  डिम्बवाहिनी बंधन 
प्रजनन शक्ति बढाने वाली दवाओं का सेवन भी इसका एक कारण हो सकता है 
और या फिर सहवास के तुरंत बाद ली जाने वाली गर्भ निरोधक पिल्स |
आजकल आधुनिक चिकत्सा उपकरणों से इस स्थिति का उचित उपचार सम्भव है चिकित्सक की निगरानी में कईं सफल प्रसूति केस सम्पूर्ण करावाये जाते हैं परन्तु गंभीर स्तिथियों में चिकित्सक विभिन्न अत्याधुनिक विधियों का प्रयोग करके गर्भ को हटा देते है परम्परागत सीजेरियन तरीकों से कईं बार पुराने समय के चिकित्सक महिला की डिम्बवाहिनियाँ,अंडाशय और गर्भाशय तक हटा देते थे जिस से वो महिला भविष्य में कभी गर्भवती नहीं हो पाती थी  परन्तु अब अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक निदान से बिना किसी अंग हानि के निदान सम्भव है |
(यह मात्र जानकारी है कोई विशेषज्ञ लेख नहीं है) 
 

 

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

क्यों है वर्ष २०११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष? Why 2011 is international year chemistry?

वर्ष २०१११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष

क्यों है वर्ष २०११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष?  Why 2011 is international year chemistry?
वर्ष २०११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है २०११ में रसायन और भौतिकी की एक प्रख्यात वैज्ञानिक मैडम क्यूरी को नोबल पुरस्कार मिले को १०० वर्ष पूरे हुए है इस लिए इन्हें सम्मान स्वरूप भी इस वर्ष को  अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष के रूप में मनाया जाना इनके निमित्त श्रद्धांजलि होगी |
http://hi.wikipedia.org/wiki
विज्ञान की दो अलग अलग शाखाओं में भौतिकी और रसायन में अलग अलग नोबल पाने वाली और नोबल के इतिहास में कीर्तिमान बनाने वाली मैडम क्युरी को पहला नोबल भौतिकी १९०३ में उनके पति पियरे क्युरी  और उनके गुरु हेनरी बेक्वेरेल के साथ साझे में मिला था और दुसरा नोबल उनको रसायन में उनके अभूतपूर्व योगदान रेडियोधर्मिता की खोज के लिए मिला था |
जैसे कि
विश्व भौतिकी वर्ष-२००५
अन्तराष्ट्रीय पृथ्वी ग्रह वर्ष-२००८
अन्तराष्ट्रीय खगोलिकी वर्ष-२००९
अन्तराष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष-२०१०
को  मनाया गया इसी प्रकार वर्ष २०११ को सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष २०११ को अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है |
सयुंक्त राष्ट्र संघ सन १९५९ से ही विषय केंद्रित अन्तराष्ट्रीय वर्ष घोषित कर रहा है |यह इस लिए किया जाता है कि विषय के बारे में  उस के मुद्दों के बारे में दुनिया की का ध्यान आकर्षित किया जा सके और इन के अंतर्गत समस्याओं का हल निकाला जा सके और ज्ञान वर्धन किया जा सके |
वर्ष 2011 को अंतर्राष्ट्रीय रसायन शास्त्र वर्ष के रूप में मनाने की शुरुआत,
" वर्ष 2008 में संयुक्त राष्ट्र की 63वीं आमसभा में लिए गए संकल्प के मुताबिक वर्ष 2011 को अंतर्राष्ट्रीय रसायन शास्त्र वर्ष के रूप में मनाया जाएगा"
इस वर्ष रसायन विज्ञान की वैज्ञानिक उपलब्धियां तथा मानव ज्ञान,पर्यावरण सुरक्षा,स्वास्थ्य सुधार तथा आर्थिक विकास में रसायन विज्ञान के योगदानों के उत्सव के रूप में मनाया जाएगा |
अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष-२०११ की मुख्य विषय वस्तु है : 'रसायन विज्ञान-हमारा जीवन हमारा भविष्य' "Chemistry–our life, our future,"  
सयुंक्त राष्ट्र संघ ने अंतर्राष्ट्रीय रसायन शास्त्र वर्ष-२०११ को सफल बनाने का दायित्व यूनेसको UNESCOआई.पी.यू.ए.सी. International Union of Pure and Applied Chemistry को सौंपा है | इसके कार्यक्रमों के अंतर्गत वर्ष २०११ में कईं तरह की इंटरएक्टिव एवं शैक्षिक गतिविधियों का विश्ववयापी आयोजन किया जाएगा |
स्थानीय रीजनल एवं राष्ट्रीय स्तर पर आम  लोगो की भागेदारी सुनिशित की जायेगी |
तांकि आम आदमी भी समझ सके कि मानव की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रसायन विज्ञान की क्या भूमिका है यही वह विज्ञान है जिस ने मानव को विकसित करने के साथ साथ मानव समाज की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है |
उदेश्य :
-युवा वर्ग में रसायन की रूचि पैदा करना|
-प्रक्रतिक संसाधनों का कुशल प्रबंधन करने के लिए रसायन विज्ञान का प्रयोग किया जाएगा |
- रसायन विज्ञान सृजनात्मक भविष्य के बारे में जागरूकता पैदा की जायेगी |
-मानव के पृथ्वी और ब्रम्हाण्ड के बारे में जानकारी के अंतर्गत रसायन विज्ञान के ज्ञान का समावेश  |
-आणविक ओषधि ,आणविक उर्जा के विकास में रसायन विज्ञान की अहम भूमिका होगी |
-महिलाओं के विज्ञान में योगदान को समझने का सुअवसर होगा यह  २०११ वर्ष |
साथ ही साथ आओ हम भी शुरू कर देतें हैं इसका आयोजन ये जानकर कि रसायन विज्ञान की कितनी शाखाएं है |
अकार्बनिक  रसायन विज्ञान
कार्बनिक रसायन विज्ञान
भौतिक  रसायन विज्ञान
विश्लेषक  रसायन विज्ञान
जीव  रसायन विज्ञान
कृषि रसायन विज्ञान
ओषधि  रसायन विज्ञान
ओद्योगिक  रसायन विज्ञान
नाभकीय  रसायन विज्ञान
भू  रसायन विज्ञान
अंतरिक्ष  रसायन विज्ञान
हरित  रसायन विज्ञान
अभियांत्रिक  रसायन विज्ञान
आदि  आदि










सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

सर्दियों में मुहँ से सांस के साथ धुंआ निकलता है वो क्या है? Why Breath Visible in Winter?

breath  सर्दियों में मुहँ से सांस के साथ धुंआ सा क्यों निकलता है ये बात  अक्सर पूछते है बच्चें,
ऐसा क्यूँ होता है?
   ये मुहँ से निकलने वाला धुंआ क्या होता है?   
   जब हमारी सांस लेने  की क्रिया में वायु फेफड़ों द्वारा बहार निकाली   जाती है तो उस में जो जलवाष्पे water vapours होती है |
   आओ पहले ये जाने कि ये जल वाष्पे सांस में कहाँ से आती है
   श्वशन क्रिया के दौरान शरीर में CO2 कार्बनडाईऑक्साइड और पानी H2O बनते है यही पानी जलवाष्प के रूप में फेफड़ों द्वारा वाष्पन के द्वारा मुहँ या नाक से बहार निकाल दी  जाती है
श्वशन/पाचन के दौरान बनने वाला जल और हमारे द्वारा पीया गया जल भी मूत्र,पसीना,वाष्पीकरण द्वारा ही बाहर आता है|
अब देखें इसकी रासायनिक समीकरण,
Glucose + Oxygen = Carbon Dioxide + Water + Energy
C6H12O6+ 6O2=6CO2+ 6H2O + Energy
आओ अब जाने आगे
सर्दियों में शरीर से बहार यानी कि वायु मंडल का तापमान बहुत कम होता है जैसे ही यह जलवाष्प सांस के साथ बाहर आती है तुरंत ही संघनित Condense कर पानी की छोटी छोटी बूंदों Water Dropletes में बदल जाती है और दिखाई देने लगती है जिसे धुंआ सा कहा जाता है|
यह क्रिया हर समय हर मौसम में चलती है तो फिर गर्मियों में क्यूँ नहीं दिखाई देती है यह धुंआ?
गर्मियों में बहार का तापमान अधिक होने के कारण ये जलवाष्प संघनित Condense नहीं होने पाती है और जल्दी से पुन्ह वाष्पीकरण हो जाता है |
छोटे बच्चे अक्सर गावं में मजाक करते है देखो मै बीडी पी रहा हूँ इस धुवें को दिखा कर |  



 

शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010

क्या होता है इंटरनेट ? What is Internet ?

क्या होता है इंटरनेट ? What is Internet ?
आज इन्टरनेट का नाम सभी जानते है, ये नाम हमारे लिए नया नहीं रह गया है! आज ये हमारे जीवन का एक हिस्सा बन चुका है! इन्टरनेट से हमारा जीवन कितना सरल हो गया है!
लेकिन सवाल ये उठता है कि इन्टरनेट कहते किसे है?
सूचनाओ और दस्तावेजों के आदान-प्रदान के लिए टी सी पी /आई पी प्रोटोकॉल का उपयोग कर के बनाया गया नेटवर्क जो वर्ल्ड वाइड नेटवर्क के सिद्धांत पर कार्य करता है उसे इन्टरनेट कहते है!
टी सी पी का अर्थ है ट्रांस्मिस्अन कण्ट्रोल प्रोटोकॉल
आई पी का अर्थ है इन्टरनेट प्रोटोकॉल
इन्टरनेट कनेक्शन के प्रकार............
१. अनालोग/ डायल उप
२. आई एस डी एन
३. बी आई एस डी एन
४. डी एस एल
५. केबल
६. वायरलेस इन्टरनेट कनेक्शन/ ब्रोड्बैंड
७. टी १ लाइन
८. टी ३ लाइन
जिस तरह हर सिक्के के दो पहलु होते है उसी तरह इन्टरनेट के भी है!
इसके कई फायदे और नुकसान भी है! अब ये निर्भर करता है इसका उपयोग करने वाले पर की वो अपने अंदर के इंसान को जगाता है या फिर शैतान को.................सबसे पहले हम इन्टरनेट से होने वाले फायदे के बारे में बात करते है!
इन्टरनेट से फायदे:
  • कमुनिकेशन - इन्टरनेट के द्वारा हम काफी दूर बैठे व्यक्ति से बिना किसी अतिरिक शुल्क के घंटो तक बात कर सकते है! सूचनाओ के आदान प्रदान के लिए इ-मेल कर सकते है!
  • जानकारी - किसी भी तरह की जानकारी हम सर्च इंजन के द्वारा कुछ पल में प्राप्त कर सकते है!
  • मनोरंजन - ये हमारी बोरियत खतम करने का सबसे अच्छा माध्यम बनकर उभरा है! संगीत प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, संगीत, गेम्स,फिल्म इत्यादि बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के डाऊनलोड कर सकते है!
  • सर्विसिंगइन्टरनेट पर कई तरह की सुविधाए है जैसे कि आनलाइन बैंकिंग, नौकरी खोज,
रेलवे टिकट बुकिंग, होटल रिजर्वेशन इत्यादि सुविधायें घर बैठे मिल जाती है!
  • इ-कामर्स- ये सुविधा बिसिनेस डील और सूचनाओं के आदान-प्रदान से सम्बंधित है!
  • शोसल नेटवर्किंग साईट- आजकल इसका चलन बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है! सेलिब्रिटीस तक इसका अपनी बातों को सभी तक पहुचने के लिए जमकर उपयोग कर रहे है! इसके कई फायदे है! अलग अलग विचारों वाले दोस्त बनते है, जिनसे काफी कुछ सीखने को मिलता है! ये साईट काफी मात्रा में पठनीय सामग्री तक रखे हैं! आज ये अपनी बात दूसरों के सामने रखने का सबसे अच्छा साधन बन रहा है!
इन्टरनेट से नुक्सान:
  • व्यक्तिगत जानकारी की चोरी- व्यक्तिगत इन्फर्मेशन की चोरी के कई मामले सामने आये है जैसे की क्रेडिट कार्ड नम्बर, बैंक कार्ड नम्बर इत्यादि की चोरी! इसका उपयोग देश की सुरक्ष्हा व्यवस्था को भेदने के लिए भी किया जाता है
  • स्पामिंग- ये अवांछनीय ई-मेल होती है जिनका मकसद गोपनीय दस्तावेजों की चोरी करना होता है!
  • वायरस- इनका उपयोग कंप्यूटर की कार्य प्रणाली को नुक्सान पहुचाने के लिए किया जाता है!
  • पोरोनोग्रफी- ये इन्टरनेट मे जहर की तरह है! जिसमे कई लोग समाते चले जाते है! इस तरह की साईट पर ढेरो अश्लील सामग्री रहती है,जिनको देखकर लोग बर्बादी की तरफ अग्रसर हो रहे है और इस तरह का व्यपार चलाने वाले अच्छी आमदनी कर रहे है! ये हमारे समाज में जहर की तरह घुल रहा है! बच्चे इसको देखकर बर्बाद हो रहे है जिससे वो कई तरह के अपराध कर डालते है छोटी सी उम्र में ही जिसका परिणाम बेहद ही खतरनाक होता है! इसे रोकने के लिए सख्त नियम बनने चाहिए!
  • पाइरेसी- इससे काफी नुकसान हो रहा है आई.टी. जगत और फिल्म नगरी को! कोई भी सॉफ्टवेर या  मूवी हो इस पर बिना कोई कीमत दिए मुफ्त में मिल जाता है, तो फिर कोई पैसे क्यों लगाये, ये तभी रुक सकता है जब सरकारें ऐसी वेबसाइटस पर ही पाबन्दी लगा दे अन्यथा ये कभी रुकने वाली नहीं है!
" जिस प्रकार सागर मंथन से विष और अमृत दोनों निकले थे, ठीक उसी प्रकार इन्टरनेट पर भी ये दोनों ही है, अब ये उपयोगकर्ता पर निर्भर करता है की वो क्या लेता है विष या अमृत! इन्टरनेट से अगर आप बन सकते है तो बिगड भी सकते है! जिस तरह एक सिक्के के दो पहलु होते है उसी तरह इन्टरनेट के भी है इसलिए अच्छा वाला ग्रहण किया जाये और बुरा वाला त्याग किया जाये, ये हमारे और हमारे देश दोनों के लिए अच्छा है! ’’
लेख: महिंद्र गौर,दर्शन लाल बवेजा  
चित्र गूगल इमेज से साभार