सोमवार, 25 अप्रैल 2011

क्या है आपदा और आपदा प्रबंधन ? Disaster Management ?

क्या है आपदा और आपदा प्रबंधन ? Disaster Management ?
आपदा प्रबंधन सीखना समय की मांग 
जापान की आपदा ने एक बार फिर बता दिया है कि प्रकृति की मार सब से भयंकर होती है ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम आपदा आने पर किस प्रकार हम बच सके और दूसरों की भी जान बचा सके. आपदा प्रबंधन  के द्वारा हम यह सब  जान सकते है
आपदा को अंग्रेज़ी में Disaster कहा जाता है Hazard,Risk दो अन्य अंग्रेज़ी के समानार्थी शब्द है और हिंदी में भी इस को कईं शब्दों जैसे प्रलय,विपदा,प्रकोप,विपत्ति,खतरा शब्दों से जाना जाता है परन्तु आपदा के लिए सर्वथा Disaster ही उपयुक्त शब्द है
आपदा एक असामान्य घटना है जो थोड़े ही समय के लिए आती है और अपने विनाश के चिन्ह लंबे समय के लिए छोड़ जाती है
प्राकृतिक आपदा को परिभाषित करते हुए कहा जा सकता है कि एक ऐसी प्राकृतिक घटना जिस में एक हज़ार से लेकर दस लाख लोग तक प्रभावित हों और उनका जीवन खतरे में हो तो वो प्राकृतिक आपदा कहलाती है
बेशक प्राक्रतिक आपदाएं मनुष्य व अन्य जीवों को बहुत प्रभावित करती है प्राकृतिक आपदा को कई रूपों में जाना जाता है
httpen.wikipedia.orgwikiFileHurricane_Katrina_August_28_2005_NASA.jpg httpen.wikipedia.orgwikiTyphoon httphi.wikipedia.orgwiki%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0Gigante.jpg httpen.wikipedia.orgwikiAvalanche
    उपर के चित्र है: १.हरिकेन २.टायफून ३.सुनामी ४.हिमघाव
हरिकेन, सुनामी, सूखा, बाड़, टायफून, बवंडर, चक्रवात सब मौसम से सम्बन्धित प्राकृतिक आपदा हैं
भूस्खलन और अवधाव या हिमघाव (बर्फ की सरकती हुई चट्टान) ऐसी प्राकृतिक आपदा हैं जिस में स्थलाकृति बदल जाती है
भूकम्प और ज़्वालामुखी(ज़्वालामुखी के कारण अग्निकांड,दावानल)  टेक्टोनिक प्लेट (प्लेट विवर्तनिकी) के कारण आते हैं
टिड्डीदल का हमला,कीटो का प्रकोप  को भी प्राकृतिक आपदा माना गया है
जवालामुखी,भूकम्प,सुनामी,बाड़,दावानल,टायफून,बवंडर,चक्रवात,भूस्खलन ये सब तीव्रगामी आपदाएँ हैं जबकि सूखा,कीटो का प्रकोप,अग्निकांड मंदगामी आपदाएँ है
मानवीकृत (Man Made) आपदाएँ वो हैं जो मानवीय क्रियाकलाप के कारण होते हैं, जैसे अग्निकांड, बाड़े, भूस्खलन, सूखा
यहाँ पर यह बता देना अति आवश्यक हो जाता है कि मानवीय दखल से एक नए प्रकार की आपदा से मनुष्य को दो चार होना पड रहा है और वो है, पर्यावरणीय आपदा वैश्विक ऊष्मन Global Warming.
ओद्योगिक क्रियाकलाप जनसंख्या वृद्धि और प्रकृति के साथ खिलवाड़ ने पर्यावरणीय आपदा को जन्म दिया हैआपदाएँ तो प्राचीन काल से ही आती रही होंगी परन्तु आज के प्रगतिशील मानव ने उनको समझने में जो तेजी ला दी है इससे जन्म हुआ आपदा प्रबंधन का और मनुष्य ने इसके अंतर्गत इन परिस्तिथियों ने जानमाल के कम से कम नुकसान के लिए बहुत से प्रयास किये हैं
कुछ अति विनाशकारी  प्राकृतिक आपदाएं ऐसी थी जिन का जिक्र यहाँ करना जरूरी है जिस के बाद इस अवधारणा ने जन्म लिया की आपदा प्रबंधन क्यूँ जरूरी है
१९९५ की सुनामी,भारत इरान और तुर्की के भयंकर भूकंप, न्यू इंग्लैण्ड व क्युबेक के बर्फीले तूफ़ान, नेब्रास्का में ओलो का कहर, एरिजोना और कलिफोर्निया के दावानल, जापान के भूकम्प आदि त्रासदियाँ आपदा प्रबंधन सिखाने के लिए काफी है
आपदा प्रबंधन के अंतर्गत ही सबसे बड़ा कदम जो उठाया गया कि ऐसी तकनीके विकसित करने पर जोर दिया गया कि आपदा की किसी तरह भविष्यवाणी की जा सके
इस उद्देश्य में अंतरिक्ष विज्ञान से बहुत कामयाबी मिली,उपग्रहों की मदद से हरिकेन, टायफून, बवंडर, चक्रवात की सटीक भविष्यवाणी कर के कई बार लाखों लोगो की जानमाल की हानि को बचाया जा सका है। अब तकनीकों की मदद से यह प्रयास जारी हैं कि किसी तरह भूकंप व सुनामी की भी भविष्यवाणी की जा सके, इसके लिए पालतू व अन्य जन्तुओं के व्यवहार परिवर्तन को भी वैज्ञानिक गौर कर रहे हैं
भूकम्प जैसी आपदा के समय LPG रिसाव आग जैसी दुर्घटना को जन्म देता है,विधुत सप्लाई कट जाती है, जलापूर्ति बंद हो जाती है, जलापूर्ति की घरेलू कनेक्शन पाईप टूट जाने से टैंक का पानी बह जाता है, खाद्य पदार्थ नष्ट हो जाते हैं, लोग मलबे में दब जाते हैं, सड़के मलबे से अट जाती हैं, सहयता देर से पहुँचती है, दोबारा भूकम्प का भय मन में बना रहता है, पीने के साफ़ स्वच्छ पानी का आभाव, कुछ लोग मलबे में से माल तलाश में लूटपाट को बढ़ावा देते है, मृतको की बदबू और महामारी फ़ैल जाती है, सुरक्षित आश्रय नहीं बचता, लोग सहयता सामग्री लूट सकते हैं, जमाखोरी बढ़ जाती है
ऐसी स्थतियों से निपटने के लिए ही आपदा प्रबंधन सीखना अति आवश्यक है यह तो बकायदा अनिवार्य पाठ्यक्रम होना चाहिए और प्रत्येक नागरिक के लिए इसका प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए|   

मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

क्या होते है अंगराग? what is cosmetics ?

क्या होते है अंगराग,सोंदर्य प्रसाधन?  what is cosmetics ?
http://hi.wikipedia.org
प्राचीन  काल से ही सुंदर दिखने की चाह में मानव जाति  ने अपने शरीर  को सजाने और साफ़ रखने के लिए विभिन्न पदार्थों का प्रयोग किया है, अपने शरीर  को सजाने और साफ़ रखने के लिए प्रयोग की जाने वाली विभिन्न वस्तुओं को अंगराग कहते है|
मनुष्य ने अपने अंगों को आकर्षक.साफ़,स्वच्छ,सुडोल,सुंदर,त्वचा को चमकदार,सुकोमल,दीप्तिमय,मृदु और कांतियुक्त रखने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहा है वैसे तो किसी मनुष्य का सौंदर्य उसकी मानसिक शुद्धि और आंतरिक स्वास्थ्य पर निर्भर करता है फिर भी ये अंगराग और विभिन्न सुगंधे भी उस के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने के लिए विशेष महत्व रखती है |
आधुनिक काल में तो विभिन्न अंगरागों का उपयोग विभिन्न शारीरिक दोषों को दुरुस्त करने के लिय भी किया जा रहा है हम इन अंगरागों को ओपचारिक सोंदर्य प्रसाधनों के रूप में भे जान सकते है परन्तु इस में वे उपकरण  नहीं आते है जैस कैंची ,उस्तरा, कंघी, विभिन्न प्रकार के ब्रुश,बल कचोटने की चिमटी आदि
तो फिर अंगरागों में आते है बाल सवारने के विभिन्न शैम्पू,खुशबुदार तेल,दाड़ी बनाने की क्रीम जेल साबुन,विलेपन(क्रीम),उबटन,पसीना कम करने वाले टेळक,डीयोडरेन्ड,रंजनशलाका, बिंदी, काजल,मस्कारा, आदि परन्तु नहाने के साबुन और रूम फ्रेशनर्स नहीं |
बालों के प्रसाधन ,तवचा के प्रसाधन ,मुख प्रसाधन ,नख प्रसाधन ,गुप्तंग्क प्रसाधन, गंधमार प्रसाधन आदि     
मनुष्य के शरीर से एक स्निग्ध तरल पदार्थ निकलता है  24 घंटों में यह मात्र 2 ग्राम होता है इसमें वसा जल लवण और नाईट्रोजनयुक्त पदार्थ होते है यदि तवचा से यह रिसाव पर्याप्त मात्रा में होता रहे तो बाल और त्वचा कान्तिमान रहती है |
यह कांति बनाए रखने का एकमात्र सरल उपाय है व्यायाम, व्यायाम करने से शरीर से प्रचुर मात्रा में पसीने के साथ  स्निग्ध तरल पदार्थ निकलता है जिस कारण बाल त्वचा कांतिमय बनी रहती है और त्वचा के छिद्रों में फसी मैल भी निकल जाती है
आजकल के बच्चों, किशोरों  और युवाओं के व्ययामशील ना होने के कारण और प्रदूषण के शिकार होने के कारण त्वचा सूखी या फिर मैल युक्त मुहांसो भरी होती है इन को उपचारित करने के लिए विभिन्न फेसवाश के लवणयुक्त क्षार त्वचा को हानि पहुंचाते हैं|
कुछ परम्परागत अंगराग 
मेहँदी,चंदन,हल्दी,लस्सी,दही,अंडा,कपूर,वनस्पतितेल,कुमकुम,गुलाबजल,निम्बू,आवला,रीठा,शिकाकाई आदि 
    

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

क्या होता है ओस,पाला और कोहरा या धुंध? Whats Dew,Frost and Mist or Fog?

क्या होता है ओस,पाला  और कोहरा या धुंध? Whats Dew,Frost and Mist or Fog?
http://en.wikipedia.org/wiki/Dew
आओ पहले जाने ओस क्या है?
जैसा  कि हम जानते हैं कि वायु मंडल में जल वाष्प मौजूद होती हैं पृथ्वी धरातल रात्री में विकिरण द्वारा ऊष्मा त्याग कर शीतलीकरण प्रक्रिया सम्पन्न करती है| तब इन शीतलीकृत तलों पर संचित जल की बूंदों को ओस कहते है अत: ओस वायु में उपस्थित जल वाष्प के धरातल पर संघनित(वाष्प का द्रव बनना) होने से उत्पन्न होती है| स्वच्छ और शांत रातों में जब धरातल तीव्र गति से ठंडा होता है तब ओस उत्पन्न होती है परन्तु जब रात्रि बादलों युक्त हो तो ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण धरातल पूरी तरह से ठंडा नहीं हो पाता इस लिए बादलों वाली रात को ओस नहीं पड़ती|
जल के प्राप्ति जिन स्थानों पर आसानी से नहीं हो सकती हो उन स्थानों पर ओस बूंद संग्रहण विधि Dew Recovering से साफ़ पानी एकत्र करते है इस विधि में दो प्रकार से ओस एकत्र की जा सकती 
http://en.wikipedia.org/wiki/Dew
पतली स्टील वायर यानी कि तार ले कर उस का एक जाल बनाया जाता है जो कि २०-२५ वर्ग फुट तक हो सकता है छत पर या घर के आंगन में १०-१२ फुट ऊँचाई पर, शाम से रात और सुबह तक ओस की बूंदे तारों से फिसल फिसल कर एक धार का रूप लेती हुई एक टैंक में एकत्र होती रहेंगी और २००-३०० लीटर जल प्रतिदिन एकत्र हो जाता है जिस का उपयोग दैनिक कार्यों में जल की आवश्यकता को पूरा करने  के लिए किया जा सकता है  
हिमाचल प्रदेश में इस विधि का प्रयोग करते है |
विदेशों में तो छते ढालदार बनाई जाती है जिन पर से ओस की बूंदे फिसल कर एक टैंक में एकत्र होती है और जल संग्रहण हो जाता है |  
http://en.wikipedia.org/wiki/Frost
आओ अब जाने पाला क्या है? 
आमतौर पर शीतकाल की लंबी राते ज्यादा ठंडी होती है और कईं बार तापमान हिमांक  freezing point पर या इस से भी नीचे चला जता है ऐसी स्थिति में जलवाष्प बिना द्रव रूप में परिवर्तित हुए सीधे ही सुक्ष्म हिमकणों में परिवर्तित हो जाते है इसे पाला कहते है पाला फसलों और वनस्पतियों के लिए बहुत हानिकारक होता है |
उत्तर भारत में दिसम्बर से फरवरी महीने पाला पड़ने वाले दिन है ऐसे में यहाँ के किसान फसलों के छोटे पौधों को बचाने के लिए फसलों की सिंचाई कर देते है खेतों में पानी दिये जाने से आद्रता बढ़ जाने से जल वाष्प अपने में संचित उष्मा से वायु और धरातल को ज्यादा ठंढा नहीं होने देती |   
कोहरा दृश्यता एक किमी से अधिक
आओ अब जाने कोहरा या धुंध क्या है? 
कोहरा वास्तव में एक निम्न स्तरीय मेघ ही होता है वायु मंडल में उपस्थित जलवाष्प जब ओसांक से नीचे जाती है पर हिमांक से उपर रहती है उस स्थिति में पानी की छोटी छोटी बूंदे वायुमंडल में देर तक लटकी रहती हैं| इस स्थिति में दृश्यता बहुत कम हो जाती है इस प्रकार का कोहरा शीतकाल में उत्तरी भारत में देखा जा सकता है |
कईं बार जब कोई गर्म और आद्र वायु ठन्डे धरातलीय इलाके से गुजरती है तो संघनित हो कर कोहरे का रूप लेती है इसे अभिवहन कोहरा कहते हैं |
स्माग दिल्ली में
यहाँ एक और पद 'स्माग' से परिचित होना भी जरूरी है जब कोहरे का धुएं के साथ मिश्रण होता है तो उस को स्माग कहते है स्माग ज्यादातर ओद्योगिक और शहरी क्षेत्रो में जल कणों का कार्बन कणों तथा अन्य सुक्ष्म कणों के मिश्रण से अधिक तीव्रता से बनता है और ज्यादा देर तक बना रहता है इसमें विभिन्न रसायनों की वाष्पे मिल जाने से इसकी प्रकृति अम्लीय भी हो जाती है जो की अधिक हानिकारक है |
धुंध
कुहासा अथवा धुंध भी एक प्रकार का कोहरा ही होता है बस दृश्यता का अंतर होता है यदि दृश्यता की सीमा एक किमी या एक किमी से कम हो तो उसे कुहासा या धुंध कहते हैं कईं बार धूल कणों के मिलने के कारण दृश्यता विसिबिलिटी बहुत कम यानी कुछ मीटर तक ही रह जाती है इस स्थिति में वाहनों की दुर्घटनाएं होती है ऐसे समय में रेल और वायु परिवहन बाधित होता है |
धुंध की स्थिति में सूर्य की किरणों को  धरातल तक पहुँचने में अधिक समय लगता है |                    

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

क्यों है वर्ष २०११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष? Why 2011 is international year chemistry?

वर्ष २०१११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष

क्यों है वर्ष २०११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष?  Why 2011 is international year chemistry?
वर्ष २०११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है २०११ में रसायन और भौतिकी की एक प्रख्यात वैज्ञानिक मैडम क्यूरी को नोबल पुरस्कार मिले को १०० वर्ष पूरे हुए है इस लिए इन्हें सम्मान स्वरूप भी इस वर्ष को  अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष के रूप में मनाया जाना इनके निमित्त श्रद्धांजलि होगी |
http://hi.wikipedia.org/wiki
विज्ञान की दो अलग अलग शाखाओं में भौतिकी और रसायन में अलग अलग नोबल पाने वाली और नोबल के इतिहास में कीर्तिमान बनाने वाली मैडम क्युरी को पहला नोबल भौतिकी १९०३ में उनके पति पियरे क्युरी  और उनके गुरु हेनरी बेक्वेरेल के साथ साझे में मिला था और दुसरा नोबल उनको रसायन में उनके अभूतपूर्व योगदान रेडियोधर्मिता की खोज के लिए मिला था |
जैसे कि
विश्व भौतिकी वर्ष-२००५
अन्तराष्ट्रीय पृथ्वी ग्रह वर्ष-२००८
अन्तराष्ट्रीय खगोलिकी वर्ष-२००९
अन्तराष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष-२०१०
को  मनाया गया इसी प्रकार वर्ष २०११ को सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष २०११ को अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है |
सयुंक्त राष्ट्र संघ सन १९५९ से ही विषय केंद्रित अन्तराष्ट्रीय वर्ष घोषित कर रहा है |यह इस लिए किया जाता है कि विषय के बारे में  उस के मुद्दों के बारे में दुनिया की का ध्यान आकर्षित किया जा सके और इन के अंतर्गत समस्याओं का हल निकाला जा सके और ज्ञान वर्धन किया जा सके |
वर्ष 2011 को अंतर्राष्ट्रीय रसायन शास्त्र वर्ष के रूप में मनाने की शुरुआत,
" वर्ष 2008 में संयुक्त राष्ट्र की 63वीं आमसभा में लिए गए संकल्प के मुताबिक वर्ष 2011 को अंतर्राष्ट्रीय रसायन शास्त्र वर्ष के रूप में मनाया जाएगा"
इस वर्ष रसायन विज्ञान की वैज्ञानिक उपलब्धियां तथा मानव ज्ञान,पर्यावरण सुरक्षा,स्वास्थ्य सुधार तथा आर्थिक विकास में रसायन विज्ञान के योगदानों के उत्सव के रूप में मनाया जाएगा |
अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष-२०११ की मुख्य विषय वस्तु है : 'रसायन विज्ञान-हमारा जीवन हमारा भविष्य' "Chemistry–our life, our future,"  
सयुंक्त राष्ट्र संघ ने अंतर्राष्ट्रीय रसायन शास्त्र वर्ष-२०११ को सफल बनाने का दायित्व यूनेसको UNESCOआई.पी.यू.ए.सी. International Union of Pure and Applied Chemistry को सौंपा है | इसके कार्यक्रमों के अंतर्गत वर्ष २०११ में कईं तरह की इंटरएक्टिव एवं शैक्षिक गतिविधियों का विश्ववयापी आयोजन किया जाएगा |
स्थानीय रीजनल एवं राष्ट्रीय स्तर पर आम  लोगो की भागेदारी सुनिशित की जायेगी |
तांकि आम आदमी भी समझ सके कि मानव की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रसायन विज्ञान की क्या भूमिका है यही वह विज्ञान है जिस ने मानव को विकसित करने के साथ साथ मानव समाज की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है |
उदेश्य :
-युवा वर्ग में रसायन की रूचि पैदा करना|
-प्रक्रतिक संसाधनों का कुशल प्रबंधन करने के लिए रसायन विज्ञान का प्रयोग किया जाएगा |
- रसायन विज्ञान सृजनात्मक भविष्य के बारे में जागरूकता पैदा की जायेगी |
-मानव के पृथ्वी और ब्रम्हाण्ड के बारे में जानकारी के अंतर्गत रसायन विज्ञान के ज्ञान का समावेश  |
-आणविक ओषधि ,आणविक उर्जा के विकास में रसायन विज्ञान की अहम भूमिका होगी |
-महिलाओं के विज्ञान में योगदान को समझने का सुअवसर होगा यह  २०११ वर्ष |
साथ ही साथ आओ हम भी शुरू कर देतें हैं इसका आयोजन ये जानकर कि रसायन विज्ञान की कितनी शाखाएं है |
अकार्बनिक  रसायन विज्ञान
कार्बनिक रसायन विज्ञान
भौतिक  रसायन विज्ञान
विश्लेषक  रसायन विज्ञान
जीव  रसायन विज्ञान
कृषि रसायन विज्ञान
ओषधि  रसायन विज्ञान
ओद्योगिक  रसायन विज्ञान
नाभकीय  रसायन विज्ञान
भू  रसायन विज्ञान
अंतरिक्ष  रसायन विज्ञान
हरित  रसायन विज्ञान
अभियांत्रिक  रसायन विज्ञान
आदि  आदि










बुधवार, 6 अप्रैल 2011

क्या होते है मोटे अनाज ? Mota Anaj

क्या होते है मोटे अनाज ? Mota Anaj
हमारे दैनिक भोजन में ज्यदातर चावल और गेहूं ही शामिल होते है 
जबकि हमें सभी प्रकार के  मोटे अनाज खाने चाहिए । जैसे  जई, बाजरा, ज्वार, रागी, जौ आदि। लेकिन बड़े शहरों में रहने भारत के ज्यादातर लोगों को इन तमाम मोटे अनाजों के बारे में या तो पता नहीं है या इनका इस्तेमाल उनके भोजन का हिस्सा नहीं हैं।
अब वैज्ञानिकों को पता चला है कि ज्वार खाने से कुपोषण की समस्या दूर हो सकती है। ज्वार में सारे पोषक तत्व हैं। गेहूँ में नहीं। हमारे यहाँ तो ग्रामीण भारत में पहले लोग मोटा अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, मक्का और को  ही खाते थे और स्वस्थ व सेहतमंद रहते थे। मोटे अनाज के सेवन में बहुत लाभ है, 
ज्वार, बाजरा, रागी तथा अन्य मोटे अनाज उदाहरण के लिए मक्का, जौ, जई आदि भले ही गुणवत्ता में गेहूं और चावल के समान न हों लेकिन पोषण स्तर के मामले में वे उनसे बीस ही साबित होते हैं।
जबकि भोजन  विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आपका अपने को स्वस्थ रखना चाहते है तो सबको अपने खाने में इन मोटे अनाजों को सजग होकर शामिल करें।
आओ  जाने कुछ मोटे अनाजों के बारे में और उन के गुण जान कर उन्हें अपने भोजन में शामिल कर स्वस्थ  रहें | 

रागी  ( Finger Millet)

http://en.wikipedia.org/wiki/Finger_millet

रागी कैल्शियम का जबरदस्त स्रोत है। इसलिए जो लोग ऑस्टेपेनिया के शिकार हैं और ऑस्टेपोरेसिस के भी, ऐसे दोनों लोगों के लिए यह फायदेमंद है।

यह मोनोपोज के बाद महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है।

जो लोग लेक्टोज की समस्या से पीड़ित होते हैं उनके लिए रागी कैल्शियम का जबरदस्त स्रोत है। इसीलिए रागी का इस्तेमाल छोटे बच्चों के भोजन में भी होता है।

 

ओट्स (Oats)

http://en.wikipedia.org/wiki/Oat

ओट्स या जई आसानी से पच जाने वाले फाइबर का जबरदस्त स्रोत है। साथ ही यह कॉम्पलेक्स कार्बोहाइडेट्स का भी अच्छा स्रोत है।

ओट्स हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करता है। बशर्ते इसे लो सैच्यूरेटिड फैट के साथ लिया जाए।

ओट्स एलडीएल की क्लियरेंस बढ़ाता है।

ओट्स में फोलिक एसिड होता है जो बढ़ती उम्र वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होता है। यह एंटीकैंसर भी होता है।

ओट में कैल्शियम, जिंक, मैग्नीज, लोहा और विटामिन-बी व ई भरपूर मात्रा में होते हैं।

जो लोग डिसलिपिडेमिया और डायबिटीज से पीड़ित हैं उन्हें ओट्स फायदेमंद होता है। गर्भवती महिलाओं और बढ़ते बच्चों को भी ओट खाना चाहिए। 

जौ (Barley)

http://en.wikipedia.org/wiki/Barley
जौ वह अनाज है जिसमें सबसे ज्यादा अल्कोहल पाया जाता है।
यह पच जाने वाले फाइबर का भी अच्छा स्रोत है।
यह ब्लड कोलेस्ट्रोल को कम करता है।
यह ब्लड ग्लूकोज को बढ़ाता है।
जौ मैग्नीशियम का भी अच्छा स्रोत और एंटीऑक्सीडेंट है।
अल्कोहल से भरे होने के कारण यह डायूरेटिक है इस कारण हाइपर टेंशन से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद है।

बाजरा (Millet)

http://en.wikipedia.org/wiki/Millet
बाजरा एक गर्म अनाज है। इसलिए आमतौर पर इसका स्वागत जाड़ों के दिनों में ही किया जाता है। बाजरा प्रोटीन का भंडार है। बाजरे में मैथाइन, ट्राइप्टोफान और इनलिसाइन बड़ी मात्रा में पाया जाता है।
यह थायमीन अथवा विटामिन-बी का अच्छा स्रोत है और आयरन तथा कैल्शियम का भी भंडार है।
यह उन लोगों के लिए तो बहुत ही फायदेमंद है जो गेहूं नहीं खा सकते। लेकिन बाजरे को किसी और अनाज के साथ मिलाकर खाना चाहिए।
ज्वार (Sorghum vulgare)
http://en.wikipedia.org/wiki/Sorghum
ज्वार भी एक तरह से जाड़ों में पसंद किया जाने वाला अनाज है। इसमें बहुत कम वसा होती है और ये कार्बोहाइडेट का जबरदस्त भंडार है।
इसमें भी आयरन, कैल्शियम का उपयोगी भंडार होता है। यह उनके लिए सही रहता है जो पोलिसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम से पीड़ित हैं।
यह मूत्र प्रक्रिया को सुचारू रूप से बनाए रखने में सहायक है। जिससे हाइपर टेंशन रोगी परेशान रहते हैं।

मक्का (Maize)
http://en.wikipedia.org/wiki/Maize
मक्का एक ऐसा खाद्यान है जो मोटे अनाज की ष्रेणी मे आता  है  
भुट्टा या मक्का पेट के अल्सर से छुटकारा दिलाने में सहायक है। 
अधिक रेशेवाला भोजन होने के कारण यह वज़न घटाने में अत्यंत उपयोगी है। 
यह कमज़ोरी में बेहतर ऊर्जा प्रदान करता है। 
कार्न फ्लेक के रूप में लेने पर यह हृदयरोग की रोकथाम में सहायक होता है।
इस तरह यह तमाम तरह के मोटे अनाज स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। अगर हम मोटे अनाजों के नाम पर सिर्फ गेहूं और चावल न खाकर अपने रोजमर्रा के भोजन में इन मोटे अनाजों को भी शामिल करें तो इनसे होने वाले फायदे कई गुना होंगे।
बाजरे  पर गया गया यह दिलकश पंजाबी गीत प्रकाश कौर जी की आवाज में 


शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

क्यूँ खास है आज का दिन २ अप्रैल ? 2 April ?

क्यूँ खास है आज का दिन २ अप्रैल ?
rakesh sharma २ अप्रैल १९८४ को प्रथम भारतीय को अंतरिक्ष यात्री बनने का अवसर मिला था और वो थे राकेश शर्मा ,राकेश शर्मा भारत के पहले और विश्व के 138वें अंतरिक्ष यात्री  हैं।
राकेश शर्मा की उड़ान ने भारत को दुनिया के ऐसे 14 देशों की सूची में शामिल किया था, जिनकी अंतरिक्ष में धाक जमी हुई थी।
विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) राकेश शर्मा
का जन्म पटियाला, पंजाब, भारत में 13 जनवरी 1949को हुआ था यह पहले  भारतीय और दुनिया  के लिए 138 वे  अंतरिक्ष यात्री थे|
35 वर्षीय राकेश शर्मा  ने 1984 में एक  ऐतिहासिक मिशन पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(ISRO) और सोवियत इंटरकोसमोस अंतरिक्ष कार्यक्रम के अंतर्गत  एक संयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम में दो अन्य सोवियत cosmonauts के साथ सोयुज टी -11 यान में अंतरिक्ष में आठ दिन  की यात्रा  2 अप्रैल 1984 को शुरू की थी |
2 अप्रैल 1984 का वो ऐतिहासिक दिन जब सोवियत संघ के बैकानूर से सोयूज टी-11 ने तीन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ उड़ान भरी। भारतीय मिशन की ओर से थे-राकेश शर्मा, अंतरिक्ष यान के कमांडर थे वाई.वी.मालिशेव और फ्लाइट इंजीनियर जी.एम स्ट्रकोलॉफ। सोयूज टी-11 ने तीनों को सोवियत रुस के ऑबिटल स्टेशन सेल्यूत-7 में पहुंचा दिया।
तीनों अंतरिक्ष यात्रियों ने ‘स्पेस स्टेशन’ से मॉस्को और नई दिल्ली से साझा संवाददाता सम्मेलन को भी संबोधित किया। ये ऐसा पल था जिसे करोड़ो भारतवासियों ने अपने टेलीविजन सेट पर देखा और संजो लिया।
इसी दौरान अंतरिक्ष से एक प्रसिद्ध बातचीत में उनसे जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूछा था कि भारत अंतरिक्ष कैसा दिखता है तो  उन्होंने जवाब दिया, "सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा"

(यानी कि पूरी दुनिया से बेहतर) |
भारत और सोवियत संघ की मित्रता के गवाह इस संयुक्त अंतरिक्ष मिशन के दौरान राकेश ने भारत और हिमालय क्षेत्र की फोटोग्राफी भी की।
अंतरिक्ष से उनकी वापसी पर उन्हें सोवियत संघ के हीरो के सम्मान से नवाजा गया था. भारत सरकार ने अपने सर्वोच्च वीरता (शांति समय के दौरान) पुरस्कार अशोक चक्र और उस  मिशन के अन्य दो सदस्यों रूसी यात्रियों को भी सम्मानित किया गया |
श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से ‘चंद्रयान प्रथम’ के सफल प्रक्षेपण पर भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने कहा था  कि, “हमें ये नहीं भूलना चाहिए की आज जब इसका प्रक्षेपण हुआ है, तो आज से 40 साल पहले ही इंसान चांद पर पहुंच चुका था। इस संदर्भ में देखें तो ये अनुसंधान के दायरे को कई हद तक बढ़ाता है। यह प्रक्षेपण हमारे अंतिरक्ष परियोजनाओं के लिए कई दृष्टि से महत्वपूर्ण है।”
rakesh sharma-1यात्रा से आने के बाद राकेश शर्मा हिंन्दुस्तान एरोनेट्किस लिमिटेड में टेस्ट पायलट के तौर पर कार्य करते रहे, जिस दौरान वो एक हादसे में भी बाल-बाल बचे।
आजकल श्री राकेश शर्मा ऑटोमेटेड वर्कफ्लोर कम्पनी के बोर्ड चेयमैन की हैसियत से काम कर रहे हैं।

मंगलवार, 8 मार्च 2011

क्यों रहता है मिट्टी के (घड़े) मटके का पानी ठंडा How does water kept in an earthen pot become cool during summer?

क्यों रहता है मिट्टी के मटके का पानी ठंडा How does water kept in an earthen pot become cool during summer? क्या घड़े के पानी को शुद्ध कहा जा सकता है? Can earthen pot water be called pure?
गावं के कुम्हार के चाक पर मिट्टी क्या क्या आकार लेती है पुराने समय से ही घड़े में रख कर ठंडा कर के  पानी  पीने का रिवाज़ रहा है  क्यूंकि तब फ्रीज़ तो हुआ नहीं करते थे।
 मिट्टी के घड़े यानी कि मटके में पानी कैसे ठंडा हो जाता है?
मिट्टी के घड़े की  दीवारों में असंख्य सुक्ष्म छिद्र होते है इन छिद्रों से पानी रिस्ता रहता है  जिस कारण घड़े की सतह पर हमेशा गीलापन रहता है।
घड़े की सतह पर छिद्र अतिसुक्ष्म होते है इन छिद्रों से निकले पानी का वाष्पन होता रहता है।
वाष्पन के बारे में हम जानते है की जिस सतह पर वाष्पन होता है वह सतह ठंडी हो जाती है यानी उस सतह का तापमान गिर जाता है।
इस की पुष्टि हम अन्य उदाहरणों से भी  कर सकते है  जैसे, नहाने के बाद गीला शरीर लेके पंखे के नीचे आने से शरीर ठंडक महसूस करता है।
पसीने से तरबतर गीला शरीर लेके पंखे के नीचे आने से शरीर ठंडक महसूस करता है।
स्प्रिट,शराब,थिनर आदि के हाथ पर लग जाने से ठंडक महसूस होती है।
अब वाष्पन को समझे ज़रा, इस क्रिया में पानी की वाष्प बनती है,यह क्रिया हर तापमान पर होती रहती है वाष्पन की क्रिया में बुलबुले नहीं बनते हैं और खास बात वायु की गति वाष्पन की दर को तेज कर देती है।
अब यह जाने चंद उदाहरणों से कि वायु की गति किस तरह बढ़ा देती है वाष्पन की दरअसल में वाष्प पानी के वे अणु हैं जो पानी की सतह को छोड़ कर वायुमंडल में आ जाते है और यदि वायु  की गति तेज हो तो अणुओं की सतह छोड़ने की गति भी बढ़ जाती है।
जैसे यदि धूप के दिन में हवा भी चल रही होती है तो कपड़े जल्दी सूख जाते हैं।
हवा के दिनों में त्वचा नमी छोड़ देती है और खुश्क हो जाती है।
गेहूं/फसलें  के पकने के दिनों में हवाएं चलती है जो पौधे और जमीन की नमी को वाष्पित कर देती हैं।
तो जी जब घड़े की सतह पर वाष्पन चलता रहता है तो उस की दीवारें ठंडी रहती हैं और उस में पानी भी ठंडा रहता है कुछ मात्रा में पानी की मात्रा में कमी जरूर आती है।
एक और बात जब पानी को जल्दी और ज्यादा ठंडा करना होता है तो घड़े पर गीला कपड़ा लपेट देते हैं जल जीरा बेचने वालो की रेहडी पर आपने देखा होगा वो अपने घड़ो को लाल बड़े से कपडे से लपेट कर रखते है।
हईजनिक विधि नहीं है यह बस यह सन्देश देता है के इतने तापमान का पानी पीना लाभकारी है क्या घड़े का पानी पीना स्वास्थ्यकारी है ? 
जी नहीं है। घड़े का पानी सूक्ष्म जीव(ई कोलाई) युक्त होता है घड़े के छिद्रों में धूल मिट्टी एवं प्रयोग करने की विधि से  सूक्ष्म जीव उत्पन्न हो जाते हैं व उसके पोरस में स्थायी घर बना लेते हैं। घड़े की रोज अंदर बाहर से  सफाई करके पानी भरने की जटिल प्रक्रिया है जिसको काम लोग अपनाते हैं। इसे शुद्ध मान कर कईं कईं दिन नही वाश करते।  कितना भी बात कर लो मिट्टी के घड़े के अंदर जो सूक्ष्म सिद्ध होते हैं उसमें ई-कोलाई अपना पूरा अड्डा जमा कर बैठ जाता है। हम इसके दूषित जल द्वारा सूक्ष्म जीव जनित रोगों की चपेट में आ जाते हैं। मैंने बहुत बार देखा है कि घड़े से पानी निकालने का जो गिलास (पात्र) होता है जो घड़े के ऊपर रखा होता है उसी को उंगलियों से पकड़कर घड़े के अंदर डाल कर पानी निकालने के लिए प्रयोग किया जाता है और निकालने वाले की उंगलियां पानी में डिप करती है। 
फिर क्यूँ कहते हैं घड़े का पानी पीना स्वास्थ्यकारी है ?
ये बात  समझने की है आम तौर पर हमे गर्मियों में ठंडा पानी पीने की तलब होती है और हम रेफ्रिजरेटरों या वाटर कूलर/कैम्फर से बहुत ठंडा पानी ले कर पीते है हम पी तो लेते है इतना ठंडा पानी परन्तु गले और शरीर के अंगों को एक दम से ठंडा पानी (चिल्ड) बहुत बुरा प्रभावित करता है गले की कोशिकाओं का ताप अचानक गिर जाता है जिस कारण व्याधियाँ उत्पन्न होती है। गले का पक जाना और गले मे उपस्थित ग्रंथियों में व्याधि आ जाती है और शुरू होता है शरीर की क्रियाओं का बिगड़ना।
इस लिए हमें बहुत कम ठंडा (चिल्ड नहीं) पानी पीना चाहिए जितना क ठंडा घड़े का पानी होता है।
एक  हल और है हम रेफ्रिजरेटर के पानी को ताजे पानी मिक्स करके अनुकूल तापमान पर ला कर पी सकते हैं परन्तु प्यासे बच्चे कहाँ इतने सहनशील होते है, हैं न..........