सोमवार, 11 अप्रैल 2011

क्यों है वर्ष २०११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष? Why 2011 is international year chemistry?

वर्ष २०१११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष

क्यों है वर्ष २०११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष?  Why 2011 is international year chemistry?
वर्ष २०११ अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है २०११ में रसायन और भौतिकी की एक प्रख्यात वैज्ञानिक मैडम क्यूरी को नोबल पुरस्कार मिले को १०० वर्ष पूरे हुए है इस लिए इन्हें सम्मान स्वरूप भी इस वर्ष को  अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष के रूप में मनाया जाना इनके निमित्त श्रद्धांजलि होगी |
http://hi.wikipedia.org/wiki
विज्ञान की दो अलग अलग शाखाओं में भौतिकी और रसायन में अलग अलग नोबल पाने वाली और नोबल के इतिहास में कीर्तिमान बनाने वाली मैडम क्युरी को पहला नोबल भौतिकी १९०३ में उनके पति पियरे क्युरी  और उनके गुरु हेनरी बेक्वेरेल के साथ साझे में मिला था और दुसरा नोबल उनको रसायन में उनके अभूतपूर्व योगदान रेडियोधर्मिता की खोज के लिए मिला था |
जैसे कि
विश्व भौतिकी वर्ष-२००५
अन्तराष्ट्रीय पृथ्वी ग्रह वर्ष-२००८
अन्तराष्ट्रीय खगोलिकी वर्ष-२००९
अन्तराष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष-२०१०
को  मनाया गया इसी प्रकार वर्ष २०११ को सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष २०११ को अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है |
सयुंक्त राष्ट्र संघ सन १९५९ से ही विषय केंद्रित अन्तराष्ट्रीय वर्ष घोषित कर रहा है |यह इस लिए किया जाता है कि विषय के बारे में  उस के मुद्दों के बारे में दुनिया की का ध्यान आकर्षित किया जा सके और इन के अंतर्गत समस्याओं का हल निकाला जा सके और ज्ञान वर्धन किया जा सके |
वर्ष 2011 को अंतर्राष्ट्रीय रसायन शास्त्र वर्ष के रूप में मनाने की शुरुआत,
" वर्ष 2008 में संयुक्त राष्ट्र की 63वीं आमसभा में लिए गए संकल्प के मुताबिक वर्ष 2011 को अंतर्राष्ट्रीय रसायन शास्त्र वर्ष के रूप में मनाया जाएगा"
इस वर्ष रसायन विज्ञान की वैज्ञानिक उपलब्धियां तथा मानव ज्ञान,पर्यावरण सुरक्षा,स्वास्थ्य सुधार तथा आर्थिक विकास में रसायन विज्ञान के योगदानों के उत्सव के रूप में मनाया जाएगा |
अन्तराष्ट्रीय रसायन वर्ष-२०११ की मुख्य विषय वस्तु है : 'रसायन विज्ञान-हमारा जीवन हमारा भविष्य' "Chemistry–our life, our future,"  
सयुंक्त राष्ट्र संघ ने अंतर्राष्ट्रीय रसायन शास्त्र वर्ष-२०११ को सफल बनाने का दायित्व यूनेसको UNESCOआई.पी.यू.ए.सी. International Union of Pure and Applied Chemistry को सौंपा है | इसके कार्यक्रमों के अंतर्गत वर्ष २०११ में कईं तरह की इंटरएक्टिव एवं शैक्षिक गतिविधियों का विश्ववयापी आयोजन किया जाएगा |
स्थानीय रीजनल एवं राष्ट्रीय स्तर पर आम  लोगो की भागेदारी सुनिशित की जायेगी |
तांकि आम आदमी भी समझ सके कि मानव की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रसायन विज्ञान की क्या भूमिका है यही वह विज्ञान है जिस ने मानव को विकसित करने के साथ साथ मानव समाज की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है |
उदेश्य :
-युवा वर्ग में रसायन की रूचि पैदा करना|
-प्रक्रतिक संसाधनों का कुशल प्रबंधन करने के लिए रसायन विज्ञान का प्रयोग किया जाएगा |
- रसायन विज्ञान सृजनात्मक भविष्य के बारे में जागरूकता पैदा की जायेगी |
-मानव के पृथ्वी और ब्रम्हाण्ड के बारे में जानकारी के अंतर्गत रसायन विज्ञान के ज्ञान का समावेश  |
-आणविक ओषधि ,आणविक उर्जा के विकास में रसायन विज्ञान की अहम भूमिका होगी |
-महिलाओं के विज्ञान में योगदान को समझने का सुअवसर होगा यह  २०११ वर्ष |
साथ ही साथ आओ हम भी शुरू कर देतें हैं इसका आयोजन ये जानकर कि रसायन विज्ञान की कितनी शाखाएं है |
अकार्बनिक  रसायन विज्ञान
कार्बनिक रसायन विज्ञान
भौतिक  रसायन विज्ञान
विश्लेषक  रसायन विज्ञान
जीव  रसायन विज्ञान
कृषि रसायन विज्ञान
ओषधि  रसायन विज्ञान
ओद्योगिक  रसायन विज्ञान
नाभकीय  रसायन विज्ञान
भू  रसायन विज्ञान
अंतरिक्ष  रसायन विज्ञान
हरित  रसायन विज्ञान
अभियांत्रिक  रसायन विज्ञान
आदि  आदि










बुधवार, 6 अप्रैल 2011

क्या होते है मोटे अनाज ? Mota Anaj

क्या होते है मोटे अनाज ? Mota Anaj
हमारे दैनिक भोजन में ज्यदातर चावल और गेहूं ही शामिल होते है 
जबकि हमें सभी प्रकार के  मोटे अनाज खाने चाहिए । जैसे  जई, बाजरा, ज्वार, रागी, जौ आदि। लेकिन बड़े शहरों में रहने भारत के ज्यादातर लोगों को इन तमाम मोटे अनाजों के बारे में या तो पता नहीं है या इनका इस्तेमाल उनके भोजन का हिस्सा नहीं हैं।
अब वैज्ञानिकों को पता चला है कि ज्वार खाने से कुपोषण की समस्या दूर हो सकती है। ज्वार में सारे पोषक तत्व हैं। गेहूँ में नहीं। हमारे यहाँ तो ग्रामीण भारत में पहले लोग मोटा अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, मक्का और को  ही खाते थे और स्वस्थ व सेहतमंद रहते थे। मोटे अनाज के सेवन में बहुत लाभ है, 
ज्वार, बाजरा, रागी तथा अन्य मोटे अनाज उदाहरण के लिए मक्का, जौ, जई आदि भले ही गुणवत्ता में गेहूं और चावल के समान न हों लेकिन पोषण स्तर के मामले में वे उनसे बीस ही साबित होते हैं।
जबकि भोजन  विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आपका अपने को स्वस्थ रखना चाहते है तो सबको अपने खाने में इन मोटे अनाजों को सजग होकर शामिल करें।
आओ  जाने कुछ मोटे अनाजों के बारे में और उन के गुण जान कर उन्हें अपने भोजन में शामिल कर स्वस्थ  रहें | 

रागी  ( Finger Millet)

http://en.wikipedia.org/wiki/Finger_millet

रागी कैल्शियम का जबरदस्त स्रोत है। इसलिए जो लोग ऑस्टेपेनिया के शिकार हैं और ऑस्टेपोरेसिस के भी, ऐसे दोनों लोगों के लिए यह फायदेमंद है।

यह मोनोपोज के बाद महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है।

जो लोग लेक्टोज की समस्या से पीड़ित होते हैं उनके लिए रागी कैल्शियम का जबरदस्त स्रोत है। इसीलिए रागी का इस्तेमाल छोटे बच्चों के भोजन में भी होता है।

 

ओट्स (Oats)

http://en.wikipedia.org/wiki/Oat

ओट्स या जई आसानी से पच जाने वाले फाइबर का जबरदस्त स्रोत है। साथ ही यह कॉम्पलेक्स कार्बोहाइडेट्स का भी अच्छा स्रोत है।

ओट्स हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करता है। बशर्ते इसे लो सैच्यूरेटिड फैट के साथ लिया जाए।

ओट्स एलडीएल की क्लियरेंस बढ़ाता है।

ओट्स में फोलिक एसिड होता है जो बढ़ती उम्र वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होता है। यह एंटीकैंसर भी होता है।

ओट में कैल्शियम, जिंक, मैग्नीज, लोहा और विटामिन-बी व ई भरपूर मात्रा में होते हैं।

जो लोग डिसलिपिडेमिया और डायबिटीज से पीड़ित हैं उन्हें ओट्स फायदेमंद होता है। गर्भवती महिलाओं और बढ़ते बच्चों को भी ओट खाना चाहिए। 

जौ (Barley)

http://en.wikipedia.org/wiki/Barley
जौ वह अनाज है जिसमें सबसे ज्यादा अल्कोहल पाया जाता है।
यह पच जाने वाले फाइबर का भी अच्छा स्रोत है।
यह ब्लड कोलेस्ट्रोल को कम करता है।
यह ब्लड ग्लूकोज को बढ़ाता है।
जौ मैग्नीशियम का भी अच्छा स्रोत और एंटीऑक्सीडेंट है।
अल्कोहल से भरे होने के कारण यह डायूरेटिक है इस कारण हाइपर टेंशन से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद है।

बाजरा (Millet)

http://en.wikipedia.org/wiki/Millet
बाजरा एक गर्म अनाज है। इसलिए आमतौर पर इसका स्वागत जाड़ों के दिनों में ही किया जाता है। बाजरा प्रोटीन का भंडार है। बाजरे में मैथाइन, ट्राइप्टोफान और इनलिसाइन बड़ी मात्रा में पाया जाता है।
यह थायमीन अथवा विटामिन-बी का अच्छा स्रोत है और आयरन तथा कैल्शियम का भी भंडार है।
यह उन लोगों के लिए तो बहुत ही फायदेमंद है जो गेहूं नहीं खा सकते। लेकिन बाजरे को किसी और अनाज के साथ मिलाकर खाना चाहिए।
ज्वार (Sorghum vulgare)
http://en.wikipedia.org/wiki/Sorghum
ज्वार भी एक तरह से जाड़ों में पसंद किया जाने वाला अनाज है। इसमें बहुत कम वसा होती है और ये कार्बोहाइडेट का जबरदस्त भंडार है।
इसमें भी आयरन, कैल्शियम का उपयोगी भंडार होता है। यह उनके लिए सही रहता है जो पोलिसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम से पीड़ित हैं।
यह मूत्र प्रक्रिया को सुचारू रूप से बनाए रखने में सहायक है। जिससे हाइपर टेंशन रोगी परेशान रहते हैं।

मक्का (Maize)
http://en.wikipedia.org/wiki/Maize
मक्का एक ऐसा खाद्यान है जो मोटे अनाज की ष्रेणी मे आता  है  
भुट्टा या मक्का पेट के अल्सर से छुटकारा दिलाने में सहायक है। 
अधिक रेशेवाला भोजन होने के कारण यह वज़न घटाने में अत्यंत उपयोगी है। 
यह कमज़ोरी में बेहतर ऊर्जा प्रदान करता है। 
कार्न फ्लेक के रूप में लेने पर यह हृदयरोग की रोकथाम में सहायक होता है।
इस तरह यह तमाम तरह के मोटे अनाज स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। अगर हम मोटे अनाजों के नाम पर सिर्फ गेहूं और चावल न खाकर अपने रोजमर्रा के भोजन में इन मोटे अनाजों को भी शामिल करें तो इनसे होने वाले फायदे कई गुना होंगे।
बाजरे  पर गया गया यह दिलकश पंजाबी गीत प्रकाश कौर जी की आवाज में 


शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

क्यूँ खास है आज का दिन २ अप्रैल ? 2 April ?

क्यूँ खास है आज का दिन २ अप्रैल ?
rakesh sharma २ अप्रैल १९८४ को प्रथम भारतीय को अंतरिक्ष यात्री बनने का अवसर मिला था और वो थे राकेश शर्मा ,राकेश शर्मा भारत के पहले और विश्व के 138वें अंतरिक्ष यात्री  हैं।
राकेश शर्मा की उड़ान ने भारत को दुनिया के ऐसे 14 देशों की सूची में शामिल किया था, जिनकी अंतरिक्ष में धाक जमी हुई थी।
विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) राकेश शर्मा
का जन्म पटियाला, पंजाब, भारत में 13 जनवरी 1949को हुआ था यह पहले  भारतीय और दुनिया  के लिए 138 वे  अंतरिक्ष यात्री थे|
35 वर्षीय राकेश शर्मा  ने 1984 में एक  ऐतिहासिक मिशन पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(ISRO) और सोवियत इंटरकोसमोस अंतरिक्ष कार्यक्रम के अंतर्गत  एक संयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम में दो अन्य सोवियत cosmonauts के साथ सोयुज टी -11 यान में अंतरिक्ष में आठ दिन  की यात्रा  2 अप्रैल 1984 को शुरू की थी |
2 अप्रैल 1984 का वो ऐतिहासिक दिन जब सोवियत संघ के बैकानूर से सोयूज टी-11 ने तीन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ उड़ान भरी। भारतीय मिशन की ओर से थे-राकेश शर्मा, अंतरिक्ष यान के कमांडर थे वाई.वी.मालिशेव और फ्लाइट इंजीनियर जी.एम स्ट्रकोलॉफ। सोयूज टी-11 ने तीनों को सोवियत रुस के ऑबिटल स्टेशन सेल्यूत-7 में पहुंचा दिया।
तीनों अंतरिक्ष यात्रियों ने ‘स्पेस स्टेशन’ से मॉस्को और नई दिल्ली से साझा संवाददाता सम्मेलन को भी संबोधित किया। ये ऐसा पल था जिसे करोड़ो भारतवासियों ने अपने टेलीविजन सेट पर देखा और संजो लिया।
इसी दौरान अंतरिक्ष से एक प्रसिद्ध बातचीत में उनसे जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूछा था कि भारत अंतरिक्ष कैसा दिखता है तो  उन्होंने जवाब दिया, "सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा"

(यानी कि पूरी दुनिया से बेहतर) |
भारत और सोवियत संघ की मित्रता के गवाह इस संयुक्त अंतरिक्ष मिशन के दौरान राकेश ने भारत और हिमालय क्षेत्र की फोटोग्राफी भी की।
अंतरिक्ष से उनकी वापसी पर उन्हें सोवियत संघ के हीरो के सम्मान से नवाजा गया था. भारत सरकार ने अपने सर्वोच्च वीरता (शांति समय के दौरान) पुरस्कार अशोक चक्र और उस  मिशन के अन्य दो सदस्यों रूसी यात्रियों को भी सम्मानित किया गया |
श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से ‘चंद्रयान प्रथम’ के सफल प्रक्षेपण पर भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने कहा था  कि, “हमें ये नहीं भूलना चाहिए की आज जब इसका प्रक्षेपण हुआ है, तो आज से 40 साल पहले ही इंसान चांद पर पहुंच चुका था। इस संदर्भ में देखें तो ये अनुसंधान के दायरे को कई हद तक बढ़ाता है। यह प्रक्षेपण हमारे अंतिरक्ष परियोजनाओं के लिए कई दृष्टि से महत्वपूर्ण है।”
rakesh sharma-1यात्रा से आने के बाद राकेश शर्मा हिंन्दुस्तान एरोनेट्किस लिमिटेड में टेस्ट पायलट के तौर पर कार्य करते रहे, जिस दौरान वो एक हादसे में भी बाल-बाल बचे।
आजकल श्री राकेश शर्मा ऑटोमेटेड वर्कफ्लोर कम्पनी के बोर्ड चेयमैन की हैसियत से काम कर रहे हैं।

मंगलवार, 8 मार्च 2011

क्यों रहता है मिट्टी के (घड़े) मटके का पानी ठंडा How does water kept in an earthen pot become cool during summer?

क्यों रहता है मिट्टी के मटके का पानी ठंडा How does water kept in an earthen pot become cool during summer? क्या घड़े के पानी को शुद्ध कहा जा सकता है? Can earthen pot water be called pure?
गावं के कुम्हार के चाक पर मिट्टी क्या क्या आकार लेती है पुराने समय से ही घड़े में रख कर ठंडा कर के  पानी  पीने का रिवाज़ रहा है  क्यूंकि तब फ्रीज़ तो हुआ नहीं करते थे।
 मिट्टी के घड़े यानी कि मटके में पानी कैसे ठंडा हो जाता है?
मिट्टी के घड़े की  दीवारों में असंख्य सुक्ष्म छिद्र होते है इन छिद्रों से पानी रिस्ता रहता है  जिस कारण घड़े की सतह पर हमेशा गीलापन रहता है।
घड़े की सतह पर छिद्र अतिसुक्ष्म होते है इन छिद्रों से निकले पानी का वाष्पन होता रहता है।
वाष्पन के बारे में हम जानते है की जिस सतह पर वाष्पन होता है वह सतह ठंडी हो जाती है यानी उस सतह का तापमान गिर जाता है।
इस की पुष्टि हम अन्य उदाहरणों से भी  कर सकते है  जैसे, नहाने के बाद गीला शरीर लेके पंखे के नीचे आने से शरीर ठंडक महसूस करता है।
पसीने से तरबतर गीला शरीर लेके पंखे के नीचे आने से शरीर ठंडक महसूस करता है।
स्प्रिट,शराब,थिनर आदि के हाथ पर लग जाने से ठंडक महसूस होती है।
अब वाष्पन को समझे ज़रा, इस क्रिया में पानी की वाष्प बनती है,यह क्रिया हर तापमान पर होती रहती है वाष्पन की क्रिया में बुलबुले नहीं बनते हैं और खास बात वायु की गति वाष्पन की दर को तेज कर देती है।
अब यह जाने चंद उदाहरणों से कि वायु की गति किस तरह बढ़ा देती है वाष्पन की दरअसल में वाष्प पानी के वे अणु हैं जो पानी की सतह को छोड़ कर वायुमंडल में आ जाते है और यदि वायु  की गति तेज हो तो अणुओं की सतह छोड़ने की गति भी बढ़ जाती है।
जैसे यदि धूप के दिन में हवा भी चल रही होती है तो कपड़े जल्दी सूख जाते हैं।
हवा के दिनों में त्वचा नमी छोड़ देती है और खुश्क हो जाती है।
गेहूं/फसलें  के पकने के दिनों में हवाएं चलती है जो पौधे और जमीन की नमी को वाष्पित कर देती हैं।
तो जी जब घड़े की सतह पर वाष्पन चलता रहता है तो उस की दीवारें ठंडी रहती हैं और उस में पानी भी ठंडा रहता है कुछ मात्रा में पानी की मात्रा में कमी जरूर आती है।
एक और बात जब पानी को जल्दी और ज्यादा ठंडा करना होता है तो घड़े पर गीला कपड़ा लपेट देते हैं जल जीरा बेचने वालो की रेहडी पर आपने देखा होगा वो अपने घड़ो को लाल बड़े से कपडे से लपेट कर रखते है।
हईजनिक विधि नहीं है यह बस यह सन्देश देता है के इतने तापमान का पानी पीना लाभकारी है क्या घड़े का पानी पीना स्वास्थ्यकारी है ? 
जी नहीं है। घड़े का पानी सूक्ष्म जीव(ई कोलाई) युक्त होता है घड़े के छिद्रों में धूल मिट्टी एवं प्रयोग करने की विधि से  सूक्ष्म जीव उत्पन्न हो जाते हैं व उसके पोरस में स्थायी घर बना लेते हैं। घड़े की रोज अंदर बाहर से  सफाई करके पानी भरने की जटिल प्रक्रिया है जिसको काम लोग अपनाते हैं। इसे शुद्ध मान कर कईं कईं दिन नही वाश करते।  कितना भी बात कर लो मिट्टी के घड़े के अंदर जो सूक्ष्म सिद्ध होते हैं उसमें ई-कोलाई अपना पूरा अड्डा जमा कर बैठ जाता है। हम इसके दूषित जल द्वारा सूक्ष्म जीव जनित रोगों की चपेट में आ जाते हैं। मैंने बहुत बार देखा है कि घड़े से पानी निकालने का जो गिलास (पात्र) होता है जो घड़े के ऊपर रखा होता है उसी को उंगलियों से पकड़कर घड़े के अंदर डाल कर पानी निकालने के लिए प्रयोग किया जाता है और निकालने वाले की उंगलियां पानी में डिप करती है। 
फिर क्यूँ कहते हैं घड़े का पानी पीना स्वास्थ्यकारी है ?
ये बात  समझने की है आम तौर पर हमे गर्मियों में ठंडा पानी पीने की तलब होती है और हम रेफ्रिजरेटरों या वाटर कूलर/कैम्फर से बहुत ठंडा पानी ले कर पीते है हम पी तो लेते है इतना ठंडा पानी परन्तु गले और शरीर के अंगों को एक दम से ठंडा पानी (चिल्ड) बहुत बुरा प्रभावित करता है गले की कोशिकाओं का ताप अचानक गिर जाता है जिस कारण व्याधियाँ उत्पन्न होती है। गले का पक जाना और गले मे उपस्थित ग्रंथियों में व्याधि आ जाती है और शुरू होता है शरीर की क्रियाओं का बिगड़ना।
इस लिए हमें बहुत कम ठंडा (चिल्ड नहीं) पानी पीना चाहिए जितना क ठंडा घड़े का पानी होता है।
एक  हल और है हम रेफ्रिजरेटर के पानी को ताजे पानी मिक्स करके अनुकूल तापमान पर ला कर पी सकते हैं परन्तु प्यासे बच्चे कहाँ इतने सहनशील होते है, हैं न.......... 

सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

सर्दियों में मुहँ से सांस के साथ धुंआ निकलता है वो क्या है? Why Breath Visible in Winter?

breath  सर्दियों में मुहँ से सांस के साथ धुंआ सा क्यों निकलता है ये बात  अक्सर पूछते है बच्चें,
ऐसा क्यूँ होता है?
   ये मुहँ से निकलने वाला धुंआ क्या होता है?   
   जब हमारी सांस लेने  की क्रिया में वायु फेफड़ों द्वारा बहार निकाली   जाती है तो उस में जो जलवाष्पे water vapours होती है |
   आओ पहले ये जाने कि ये जल वाष्पे सांस में कहाँ से आती है
   श्वशन क्रिया के दौरान शरीर में CO2 कार्बनडाईऑक्साइड और पानी H2O बनते है यही पानी जलवाष्प के रूप में फेफड़ों द्वारा वाष्पन के द्वारा मुहँ या नाक से बहार निकाल दी  जाती है
श्वशन/पाचन के दौरान बनने वाला जल और हमारे द्वारा पीया गया जल भी मूत्र,पसीना,वाष्पीकरण द्वारा ही बाहर आता है|
अब देखें इसकी रासायनिक समीकरण,
Glucose + Oxygen = Carbon Dioxide + Water + Energy
C6H12O6+ 6O2=6CO2+ 6H2O + Energy
आओ अब जाने आगे
सर्दियों में शरीर से बहार यानी कि वायु मंडल का तापमान बहुत कम होता है जैसे ही यह जलवाष्प सांस के साथ बाहर आती है तुरंत ही संघनित Condense कर पानी की छोटी छोटी बूंदों Water Dropletes में बदल जाती है और दिखाई देने लगती है जिसे धुंआ सा कहा जाता है|
यह क्रिया हर समय हर मौसम में चलती है तो फिर गर्मियों में क्यूँ नहीं दिखाई देती है यह धुंआ?
गर्मियों में बहार का तापमान अधिक होने के कारण ये जलवाष्प संघनित Condense नहीं होने पाती है और जल्दी से पुन्ह वाष्पीकरण हो जाता है |
छोटे बच्चे अक्सर गावं में मजाक करते है देखो मै बीडी पी रहा हूँ इस धुवें को दिखा कर |  



 

मंगलवार, 25 जनवरी 2011

जुगनू कैसे चमकता है ? How Firefly shines ?

जुगनू कैसे चमकता है ? How Firefly shines ?

jugnu प्रकृति में बहुत से जीव और वनस्पतियां स्व प्रकाश उत्पन्न करते है जीव जो  प्रकाश (पीला, हरा, लाल) उत्पन्न करते है उसको जीवदीप्ति (Bio-luminescence) कहते है जीवदीप्ति बिना गर्मी का प्रकाश होता है ये प्रकाश शीतल होता है

जीवों में मुख्यतः कुछ मोल्स्कन,स्पंज,जेली फिश,केकड़े व कुछ जाति

की मछलियाँ,lightning bugs प्रकाश उत्पन्न करते है|

पहले तक यह माना जाता रहा कि जीव फास्फोरस के कारण चमकते है लेकिन बाद में पता चल गया कि फास्फोरस के कारण ऐसा नहीं होता है|

सन् 1794 में इटैलियन वैज्ञानिक स्पेलेंज़ानी ने सिद्ध किया कि जीवों में प्रकाश उनके शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाओं के कारण होता है ये रासायनिक क्रियाएँ मुख्यत पाचन से सम्बन्धित होती है|

यह फोटोजेन  या ल्युसिफेरिन  रसायन होता है|

इन रासायनिक क्रियाओं के कारण मुख्यत दो पदार्थ बनते है|

ल्यूसिफेरिन और ल्युसिफेरेस

आक्सीकरण क्रिया के फलस्वरूप ल्यूसिफेरिन नामक प्रोटीन आक्सीकृत हो कर चमक उत्पन्न करती है |

जुगनू दो प्रकार के होते है,

1. लैपरिड

2. क्लिक बीटल

ऐसी क्या जरूरत पडी कि जुगनू या अन्य जीवों के अंदर चमकने जैसी क्रिया विकसित हुई?

अभी सही सही नहीं पता है,

यह चमक जुगनूओं को अपना आहार बनाने और आहार बनने से बचने दोनों काम आता है नर मादा जोड़ा बनाने यानी मेंटीग के लिए आकर्षण उत्पन्न करते है या दूसरे जानवरों का शिकार करने के लिये इसका उपयोग करते हैं बार बार एक निश्चित अंतराल के बाद उत्पन्न लाईट फ्लश परभक्षियों को भ्रमित करती है ये ही सब चमकने के उपयोग है|

वैज्ञानिक जुगनुओं की इस विशेष प्रोटीन से काफी नए शोध की उम्मीदे लगाएं बैठे है वैज्ञानिकों ने fireflies की चमकने वाली  प्रोटीन का इस्तेमाल कैंसर, autoimmune रोग और कई अन्य बीमारियों का इलाज की दवाओं के लिए किया है|

देखते है कवियों,साहित्यकारों और  नग्मानिगारों को कितने ही ख्याल देने वाला जुगनू वैज्ञानिकों को क्या देता है|

शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

कैसे बनती है आईसक्रीम What's in the Icecream ?

कैसे बनती है आईसक्रीम What's in the Icecream ?
कौन  होगा जिस ने आईसक्रीम ना खाई हो और देख देख के लार ना बहाई हो यह वो खाद्य है जो बच्चों किशोरों बड़ों सब में लोकप्रिय है उन सब का पसंदीदा है आज ये जाना जाएगा कैसे बनती है यह लज़ीज़  आईसक्रीम ?
परंतु क्या आईसक्रीम सचमुच ताज़ा दूध,मक्खन,मलाई,फलों आदि से ही बनती हैं? नहीं?

आइसक्रीम बनाने के लिए आवश्यक सामग्री: वनस्पती घी या हाइड्रोजिनेटेड सस्ते तेल,मिल्क पाऊडर,उच्च फ्रक्टोज युक्त मक्का की चाशनी,आटीफेशियल स्वीटनर जैसे सक्रीन या एस्पार्टेम और जहरीले संयोजक जैसे कार्बोक्सीमिथाइल सेल्यूलोज, ब्यूटिरेल्डीहाइड, एमाइल एसीटेट आदि 
डाईइथाइल ग्लाइकोल का प्रयोग अंडे के विकल्प के रूप में होता है और वायु  आकार बड़ा करने के लिए 
                                                      Polysorbate 80 का उपयोग किया जाता है  
Polysorbate 80 is an emulsifying agent, often used in ice cream to prevent milk proteins from completely coating the fat droplets. This allows them to join together in chains and nets, to hold air in the mixture, and provide a firmer texture, holding its shape as the ice cream melts.
Similar compounds are polysorbate 60, polysorbate 65, etc. 

Lecithin का उपयोग किया जाता है


Lecithin is widely used as an emulsifying agent, allowing oil and water to mix, as in mayonnaise. It is used in ice creams, salad dressings, cosmetics, and it is the main ingredient in non-stick spray coatings for cooking.
Lecithin is also an anti-oxidant, helping to keep fats from going rancid (going rancid itself in the process, however).
Lecithin is often taken as a dietary supplement, since it contains the B vitamin choline.Lecithin is the emulsifier in egg yolks that allows the oil and water to mix to make mayonnaise.

                                               Glycerol monostearate का उपयोग किया जाता है

Mono-glycerides are used as emulsifying agents in many products, such as baked goods, whipped cream, and ice cream.It is a fat that is missing two of its fatty acids. It is often used with di-glycerides, which are fats that are only missing one of their fatty acids.

       Sodium citrate का उपयोग किया जाता है

Sodium citrate is used in ice cream to keep the fat globules from sticking together. Citrates and phosphates both have this property.It is also an anti-coagulant.As a sequestering agent, sodium citrate attaches to calcium ions in water, keeping them from interfering with detergents and soaps.
फ्लेवर बनाने के लिए प्रयुक्त रसायन: चैरी फ्लेवर बनाने के लिए एल्डीहाइड सी-17,पिपरोनाल नामक रसायन वनीला फ्लेवर के लिए,पाईंन एप्पल स्वाद के लिए इथाइल एसीटेट का प्रयोग किया जाता है|
रंग बिरंगे रंग देने के लिए कृत्रिम रंजक रसायन
आपने देखा कि आईसक्रीम बनाने के लिए कितने रसायनों का प्रयोग किया जाता है इस् लिए आईसक्रीम को यदि कैमिकल बम्ब कहा जाए तो सही होगा|