शनिवार, 30 दिसंबर 2017

क्या है यह? What is this?

क्या है यह? What is this?
आकाश में यह क्या हुआ है ?
22 दिसम्बर शुक्रवार को, स्पेसएक्स रॉकेट(SpaceX rocket) लॉन्च की यह फोटोजेनिक तस्वीर दक्षिणी कैलिफोर्निया(Southern California) और एरिजोना(Arizona) के कुछ हिस्सों में यह काफी उज्ज्वल रूप में देखा गया। एक विशाल अंतरिक्षीय मछली की तरह दिखते वाला, कैलिफोर्निया के लोमपोक के पास वंडनबर्ग एयर फोर्स बेस(Vandenberg Air Force Base) से प्रभावशाली रॉकेट लॉन्च का है उज्जवलता का कारण उस समय अस्त होता सूर्य इसके विपरीत दिशा में था। फाल्कन 9 रॉकेट के द्वारा सफलतापूर्वक पृथ्वी के निचली कक्षा में 10 इरिडियम नेक्स्ट उपग्रहों(Iridium NEXT satellites) को स्थापित कर दिया गया। यह उपग्रह मुख्यतः विकासशील वैश्विक संचार नेटवर्क(developing global communications network) का हिस्सा हैं। इस उपग्रह प्रक्षेपण के पहले चरण को आप दाईं ओर देख सकते है जबकि ऊपरी भाग में रॉकेट बायीं तरफ शीर्ष पर देखा जा सकता है। इस लॉन्च के कई अच्छे वीडियो भी लिए गये है। इस छवि को ऑरेंज काउंटी, कैलिफ़ोर्निया(Orange County, California) द्वारा 2.5 सेकंड के एक्सपोज़र अवधि में कैप्चर किया गया है।
धन्यवाद आशीष श्रीवास्तव जी
स्रोत: APOD(24Dec/Astronomy Picture of the Day)

मंगलवार, 3 मई 2016

क्या होती है कीड़ा जड़ी? What is cordyceps sinensis?

क्या होती है कीड़ा जड़ी? What is cordyceps sinensis?
सामान्य तौर पर समझें तो ये एक तरह का जंगली मशरूम है जो एक ख़ास कीड़े की इल्लियों यानी कैटरपिलर्स को मारकर उसपर पनपता है। इस जड़ी का वैज्ञानिक नाम है कॉर्डिसेप्स साइनेसिस और जिस कीड़े के कैटरपिलर्स पर ये उगता है उसका नाम है हैपिलस फैब्रिकस। स्थानीय लोग इसे कीड़ा-जड़ी कहते हैं क्योंकि ये आधा कीड़ा है और आधा जड़ी है और चीन-तिब्बत में इसे यारशागुंबा कहा जाता है। ‘यारशागुंबा’ जिसका उपयोग भारत में तो नहीं होता लेकिन चीन में इसका इस्तेमाल प्राकृतिक स्टीरॉयड की तरह किया जाता है।
सर्वप्रथम इसका उल्लेख तिब्बती साहित्य में मिलता है। इस उल्लेख के अनुसार यहाँ के चरावाहों ने देखा कि यहाँ के जंगलों में चरने वाले उनके पशु एक विशेष प्रकार की घास जो कीड़े के समान दिखाई देती है, को खाकर हष्ट-पुष्ट एवं बलवान हो जाते हैं। धीरे-धीरे यह घास एक चमत्कारी औषधि के रूप मे अनेक बीमारियों के इलाज के लिए प्रयोग होने लगी। तिब्बती भाषा में इसको यारशागुंबा’ कहा जाता है। जिसका अर्थ होता है ग्रीष्म ऋतु मे घास और शीत ऋतु ऋतु में जन्तु। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार यर्सीगम्बा हिमालयी क्षेत्र की विशेष प्रकार एवं यहाँ पाये जाने वाले एक कीड़े के जीवन चक्र के अद्भुत संयोग का परिणाम है।
शक्ति बढ़ाने में इसकी करामाती क्षमता के कारण चीन में ये जड़ी खिलाड़ियों ख़ासकर एथलीटों को दी जाती है। ये जड़ी 3500 मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाती है जहां ट्रीलाइन ख़त्म हो जाती है यानी जहां के बाद पेड़ उगने बंद हो जाते हैं। मई से जुलाई में जब बर्फ पिघलती है तो इसके पनपने का चक्र शुरू जाता है रासायनिक दृष्टि से इस औषधि में एस्पार्टिक एसिड, ग्लूटेमिक एसिड, ग्लाईसीन जैसे महत्वपूर्ण एमीनो एसिड तथा कैल्सियम, मैग्नीशियम, सोडियम जैसे अनेक प्रकार के तत्व, अनेक प्रकार के विटामिन तथा मनुष्य शरीर के लिए अन्य उपयोगी तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। इसको एकत्रित करने के लिए अप्रैल से लेकर जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है। अगस्त के महिने से धीरे-धीरे प्राकृतिक रुप से इसका क्षय होने लगता है और शरद ऋतु के आने तक यह पूर्णतया: विलुप्त हो जाती है। वनस्पतिशास्त्री डॉक्टर एएन शुक्ला कहते हैं, “इस फंगस में प्रोटीनपेपटाइड्सअमीनो एसिडविटामिन बी-1, बी-और बी-12 जैसे पोषक तत्व बहुतायत में पाए जाते हैं। ये तत्काल रूप में ताक़त देते हैं और खिलाड़ियों का जो डोपिंग टेस्ट किया जाता है उसमें ये पकड़ा नहीं जाता।” कीड़ा-जड़ी से अब यौन उत्तेजना बढ़ाने वाले टॉनिक भी तैयार किए जा रहे हैं जिनकी भारी मांग है।

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

क्या हैं गुरुत्वाकर्षण तरंगें Gravitational Waves?

क्या हैं गुरुत्वाकर्षण तरंगें Gravitational Waves?
वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोज कर ली है। इनकी अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन्हें सदी की सबसे बड़ी खोज माना जा रहा है। दशकों से वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि क्या गुरुत्वाकर्षण तरंगें वाकई दिखती हैं। इसकी खोज करने के लिए यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने लीज पाथफाइंडर नाम का अंतरिक्ष यान भी अंतरिक्ष में भेजा था।
महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन से आज से तकरीबन 100 साल पहले ही इस बारे में भविष्यवाणी कर दी थी जोकि सही साबित हुई। इस खोज से न सिर्फ आइंस्टाइन का सिद्धांत प्रमाणीत हुआ है, बल्कि इससे पहली बार 2 टकराने वाले श्याम विवरों (ब्लैक होल) की भी पुष्टि हुई है।
आज से करीब सवा अरब साल पहले ब्रह्मांड में 2 श्याम विवरों (ब्लैक होल) में टक्कर हुई थी और यह टक्कर इतनी भयंकर थी कि अंतरिक्ष में उनके आसपास मौजूद जगह और समय, दोनों विकृत हो गए। आइंस्टाइन ने 100 साल पहले कहा था कि इस टक्कर के बाद अंतरिक्ष में हुआ बदलाव सिर्फ टकराव वाली जगह पर सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा था कि इस टकराव के बाद अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण तरंगें(ग्रैविटेशनल तरंगें) पैदा हुईं और ये तरंगें किसी तालाब में पैदा हुई तरंगों की तरह आगे बढ़ती हैं।
अब दुनिया भर के वैज्ञानिकों को आइंस्टाइन की सापेक्षता के सिद्धांत (थिअरी ऑफ रिलेटिविटी) के सबूत मिल गए हैं। इसे अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बहुत बड़ी सफलता माना जा रहा है। ग्रैविटेशनल तरंगों की खोज से खगोल विज्ञान और भौतिक विज्ञान में खोज के नए दरवाजे खुलेंगे।
गुरुत्वाकर्षण तरंगें पर द्रव्य (matter) का कोई असर नहीं पड़ता और ये ब्रह्मांड में बिना किसी रुकावट के विचरण करती हैं।
गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोज के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने आंकड़ो के विश्लेषन(डेटा अनैलिसिस) समेत काफी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। इंस्टिट्यूट ऑफ प्लाज्मा रिसर्च. गांधीनगर, इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रॉनामी ऐंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे और राजारमन सेंटर फॉर अडवांस्ड टेक्नॉलाजी, इंदौर सहित कई संस्थान इससे जुड़े थे।
गुरुत्वीय तरंगों की खोज का ऐलान आईयूसीएए पुणे और वाशिंगटन डीसी अमेरिका में वैज्ञानिकों ने किया। भारत उन देशों में से भी एक है, जहां गुरुत्वाकषर्ण प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है।----आशीष श्रीवास्तव
इससे सालों से चल रही गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोज का अंत होने की उम्मीद है और ब्रह्मांड के जन्म से जुड़े 'बिग बैंग' के सिद्धांत को समझने के लिए नई खिड़की खुल सकेगी---बी  बी  सी 


रविवार, 31 जनवरी 2016

क्या होता है एम्बर What is Ambar?

क्या होता है एम्बर What is Ambar?
जुरासीक पार्क पिक्चर याद है उसके डाक्टर को एम्बर में मच्छर  का जीवाश्म मिलता है जिसने डायनासोर का खून चूसा होता है .........एम्बर एक जीवाश्म रूप में रेज़िन यानी किसी पेड़ की गोंद है। यह एक किसी ऐसे वृक्ष का जीवाश्म रेज़िन(गोंद) है जो आज कहीं नहीं पाया जाता। इसको कपड़े रगड़ने से इससेआवेश पैदा होताहै। वृक्ष की  गोंद  जो समय के साथ सख़्त होकर पत्थर बन गई हो। यह देखने में एक कीमती पत्थर की तरह लगता है और प्राचीनकाल से इसका प्रयोग आभूषणों में किया जाता रहा है। यह आरम्भ में एक पेड़ से निकला गोंद होता है, इसमें अक्सर छोटे से कीट या पत्ते-टहनियों के अंश भी रह जाते हैं  जब  मानलो यह रिस रहा होता है उस समय कोई कीट पतंगा इस पर बैठ जाए तो वो इससे चिपक जाता था और उसका भी इसमें जीवाश्म रह जाता था। जब एम्बर जमीन में से निकलते हैं तो वह हलके पत्थर के ढ़ेले जैसे लगते हैं। फिर इनको तराशकर इनकी पॉलिश की जाती है जिस से इनका पीला भूरा रंग और चमक निकल आती है और इनके तब अन्दर झाँककर देखा जा सकता है। क्योंकि एम्बर किसी भी  कार्बन, आक्सीजन व हाइड्रोजन का ही तो योगिक होता है और  इन्हें अन्य हाईड्रोकार्बन की तरह जलाया जा सकता है। एम्बर का रासायनिक संगठन में पता चला है की  इससे दो अम्ल C20H30O4 सूत्र के, पृथक किए जा सके हैं, परंतु इन अम्लों के संगठन का अभी सही सही पता नहीं लगा है। 
अब नकली एम्बर भी काच और प्लास्टिक से बनने लगे हैं। नकली एम्बर  की स्पेसीफ़िक डेंसिटी अधिक होती है और यह अल्ट्रावायलेट किरणों से उसमें प्रतिदीप्ति नहीं आती। ऐंबर के अतिरिक्त अन्य कई प्रकार फ़ौसिल रेज़िन भी अनेक देशों में पाए जाते और विभिन्न कामों में प्रयुक्त होते हैं। 



बुधवार, 6 जनवरी 2016

क्या है जेसीबी मशीन? What is JCB Machine?

क्या है जेसीबी मशीन? What is JCB Machine?
हमारे आस-पास ऐसी बहुत सी छोटी छोटी चीज़ें और बातें हैं जिनके बारे में हम जानना नहीं चाहते या जानना पसंद नहीं करते या फिर हमारा ज़ेहन ऐसा होता ही नहीं कि हम जानना चाहें। हम सबने सड़कों पर या किसी कंस्ट्रक्शन साईट पर "पीले रंग" की जेसीबी मशीन गाड़ी (JCB Machine) देखी होंगी और हम आये दिन देखते ही हैं। शायद ही कभी किसी ने सोचा हो कि इसका नाम JCB (जेसीबी) क्यूँ है?  
इस JCB (जेसीबी) का क्या मतलब है? JCB मशीन दुनिया कि पहली ऐसी मशीन है जो बिना नाम के मार्किट में सन 1945 में लाँच हुई। इसको बनाने वाले बहुत दिनों तक इसको क्या नाम दिया जाए इसी में परेशान रहे। और आपको बताऊँ कि JCB (जेसीबी) मशीन का नाम ना होकर इंजन का नाम है। जिन्होंने इस गाड़ी (मशीन) का आविष्कार 1945 में किया उनका नाम "जोसफ सायरिल बमफोर्ड" (Joseph Cyril Bamford) है और आविष्कार करने के बहुत दिनों बाद कोई नाम ना सूझने पर इस एक्स्कावाटर (Excavator) का नाम उन्ही के नाम के इनिशियल पर JCB रख दिया गया। यह मशीन कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट में पूरी दुनिया में एक नयी क्रांति लेकर आई। बेसिकली यह एक एक्स्केवेशन (Excavation) मशीन है। जिसका कोई टेक्निकल मैकेनिकल और एर्गोनोमिकल नाम है ही नहीं, इसलिए इसे टेक्निकली इंसानी नाम का ब्रांड बनाया गया, (जैसे कार एक मशीन है मगर ब्रांड और लिटरली हम उसे कार के नाम से जानते हैं)। यह दुनिया का पहला ऐसा ब्रांड है जिसे ट्रेडमार्क इसके आविष्कार के 65 साल बाद सन 2009 में किया गया। जेसीबी मशीन (JCB Machines) की एक और ख़ास बात यह है यह पहली "प्राइवेट" ब्रिटिश कंपनी थी जिसने भारत में अपनी फैक्ट्री लगायी थी और आज जेसीबी मशीन (JCB Machines) का पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट भारत से ही किया जाता है। जेसीबी  मशीन (JCB Machines) का रंग पूरे दुनिया में पिछले 65 सालों से पीला ही है। याद रहे की दुनिया का सबसे पुराना ट्रेडमार्क "टाटा संस" जो कि टाटा वालों का है और यह भारत के लिए गर्व करने की बात है।
------महफूज अली 


बुधवार, 25 नवंबर 2015

क्या है लूसी AL 288-1 ? What is Lucy?

क्या है लूसी AL 288-1 ? What is Lucy?
लूसी यह AL 288-1 नामक मादा आदिमानव कंकाल का सामान्य नाम है। यह आधुनिक मानव ’होमो सैपियन्स(Australopithecus afarensis)’ की पूर्वज प्रजाति आस्ट्रेल्प्पिथेकस अफ़रेन्सीस की मादा सदस्य का 40% कंकाल है। लूसी को आज ही के दिन 24 नवंबर 1974 को इथोपिया की अवश घाटी(Awash Valley) मे अफ़ार त्रिभूज(Afar Triangle) के पास एक गांव हडार(Hadar ) मे पाया गया था। यह खोज डोनाल्ड जानसन(Donald Johanson) ने की थी।
मानव जीवन के विकास के अध्ययन को पेलेन्थ्रोपोलोजी (paleoanthropology) कहा जाता है। इस क्षेत्र मे संपूर्ण आदि मानव कंकाल नही मील पाते है, अधिकतर कंकालो के कुछ भाग, कुछ अस्थियाँ ही प्राप्त हो पाती है। लेकिन लूसी की खोज असाधारण थी, इस मामले मे उसका अधिकतर कंकाल प्राप्त हुआ था। लूसी की खोज ने उसके बारे मे और उस समय के मानव के बारे मे कई नयी जानकारीयाँ प्रदान की थी।
यह कंकाल लगभग 32 लाख वर्ष प्राचीन है। इस कंकाल की खोपड़ी छोटी है और वानरो से मेल खाती है, यह मानव दो पैरो पर चलता था और सीधा खड़ा हो सकता था जोकि आधुनिक मानवो के समान है। इन प्रमाणो से यह पता चला कि सीधे खड़े होकर चलने का मानव मस्तिष्क से कोई सीधा संबंध नही है।
लूसी इन द स्काई विथ डाइमन्डस्' बीटल्स का प्रसिद्ध गाना है। जब पुरातत्त्वविदियों कों यह अस्थिपंजर मिला और वे लौट का कैंप में आये तो बीटल्स का यह गाना बज रहा था। इसलिये इसका नाम लूसी रखा गया


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शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

क्या है कोलेस्ट्रॉल? What is Cholesterol?

क्या है कोलेस्ट्रॉल? What is Cholesterol?
कोलेस्ट्रॉल
प्रत्येक वर्ष लाखों लोगों की मृत्यु हृदय रोग से होती है। इसका मुख्य कारण है शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का सामान्य से अधिक होना। जंक फूड का सेवन, अनियमित निद्रा, योग और एक्सरसाइज से कोसों दूर रहना भी इस समस्या को और गंभीर बना देता है। खानपान और रोजाना की आदत शरीर में कोलेस्ट्रॉल स्तर को बढ़ाती भी है और घटाती भी है। ऐसे में इसका संतुलित रहना आपके स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
Formula: C27H46O
Molar mass: 386.65 g/mol
IUPAC ID: (3β)-​cholest-​5-​en-​3-​ol
Melting point: 148 °C
Density: 1.05 g/cm³
Boiling point: 360 °C
बिना व कोलेस्ट्रॉल युक्त धमनी 
कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का वसा है, जो रक्त में पाया जाता है। यह मस्तिष्क, त्वचा और अन्य अंगों को विकसित होने और उन्हें सही ढंग से काम करने के लिए बेहद आवश्यक होता है। दरअसल, लीवर शरीर के लिए मोम जैसा एक चिकना पदार्थ बनाता है, यही चिकना पदार्थ कोलेस्ट्रॉल कहलाता है। यह हमारे रक्त के सहारे शरीर के सभी हिस्सों में पहुंचकर शरीर को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है। शरीर के कार्यप्रणाली को ठीक रखने के लिए इसकी एक नियत मात्रा आवश्यक होती है। कुछ खाद्य पदार्थ जैसे मीट, अंडा, मक्खन, चीज, दूध आदि के सेवन से भी कोलेस्ट्रॉल की प्राप्ति होती है। रक्त में वसा के प्रोटीन कॉम्प्लेक्स को लिपो-प्रोटीन कहते हैं। लिपो-कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार के होते हैं, ′लो डेन्सिटी लिपोप्रोटीन′ (एलडीएल) और ′हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन′ (एचडीएल)। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को खराब (बैड) कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता है। यह रक्त में घुलनशील नहीं होता। एलडीएल के धमनियों की दीवारों में जमा होने से धमनियों में रुकावट होती है, जिससे हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। स्वस्थ रहने के लिए एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होनी चाहिए। एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को शरीर के लिए अच्छा माना जाता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल यानी धमनियों की दीवारों पर जमा हुए कोलेस्ट्रॉल को शरीर से बाहर निकाल कर हार्ट अटैक, स्ट्रोक के खतरे को कम करता है।
बीमारियों का घर
जिन्हें डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी एवं लीवर की बीमारी और हाइपर थाइरॉयडिज्म की शिकायत होती है, उनमें भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक पाया जाता है। इसके अलावा जिन महिलाओं को मेनोपॉज जल्दी होता है, उनमें भी कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने की आशंका रहती है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर यह खून पहुंचाने वाली नलियों में जमा होना शुरू हो जाता है। इससे दिमाग को सही मात्रा में रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता, जिससे स्ट्रोक का खतरा रहता है। इसके बढ़ने से हृदय तक खून पहुंचाने वाली नस भी ब्‍लॉक हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक होता है। इतना ही नहीं यह शरीर में रक्त के बहाव को भी प्रभावित करता है।
फायदेमंद भी है
अगर शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा संतुलित है, तो यह फायदेमंद भी हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर के लिए कई महत्वपूर्ण हॉर्मोन को बनाने में मदद करता है। खानपान के साथ कई तरह के बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जो कई विषैले तत्व छोड़ते हैं। कोलेस्ट्रॉल इन तत्वों को सोखकर शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। शरीर में मौजूद कोशिकाओं की बाहरी परतों को बनाने, उनकी देखभाल करने और उन्हें जीवित रखने का काम कोलेस्ट्रॉल ही करता है। शरीर पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों को विटामिन डी में बदलने, वसा में पाए जाने वाले विटामिन ए, डी, ई के लिए भी यह जरूरी है। कोलेस्ट्रॉल भोजन करने के बाद शरीर में पहुंचने वाली वसा को बाइल एसिड बनाकर पचाता है, स्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, टेस्टोस्टरोन हर्मोन का निर्माण करता है और मस्तिष्क के कार्य प्रणाली को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।
डाइट पर दें ध्यान
जंक फूड, तला-भुना और मसालेदार भोजन, धूम्रपान, शराब आदि का सेवन करने वालों में बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ता है। अंडा, लाल मीट, मक्‍खन, पनीर, केक, घी, वसा युक्त भोजन से परहेज करें और फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें। सैचुरेटेड फैट युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। वजन बढ़ने न दें। पर्याप्त नींद लें। मोटापे पर कंट्रोल करें।
डॉक्टर कहते हैं:
कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए एक अच्छा दोस्त है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। ज्यादा तला-भुना या ऑयली खाना, जंक फूड, शराब, सिगरेट, अधिक अंडे या मीट लेना, एक्सरसाइज न करना इसे बढ़ाने में मदद करता है। बढ़ता मोटापा भी इसी कारण होता है। अगर परिवार में इससे संबंधित कोई बीमारी है, तो हर छह महीने के बाद चेकअप कराएं। यह बीपी, शुगर को भी बढ़ाने में मदद करता है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहे इसके लिए हेल्दी डाइट लें। एक्सरसाइज करें। वजन पर काबू रखें। इससे जुड़ी समस्या होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
डॉ. प्रणव ईश- स्वस्थ जिंदगी के लिए शरीर में बैड नहीं गुड कोलेस्ट्रॉल का होना जरूरी है। वरना आप हृदय के अलावा कई गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।