रविवार, 22 जनवरी 2012

क्या हैं मनोसक्रिय औषधियाँ(ड्रग्स) ? What is the Psychoactive Drugs?

क्या हैं मनोसक्रिय औषधियाँ(ड्रग्स) ? What is the Psychoactive Drugs?
मनोसक्रिय औषधियाँ  
आदिम काल से ही मनुष्य ऐसी दवाओं का प्रयोग करता आ रहा है जो दिमाग पर असर करती हैं जिंदगी में नीरस काम,तनाव,प्रतिबल,अत्याधिक विपत्ति का सामना कर पाने में असमर्थ रहने पर वो कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ लेने लगता हैं जिन के सेवन से कुछ समय के लिए मनुष्य के  व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिलता है। यह  मनोसक्रिय औषधियाँ  मनुष्य की मनोदशा,सोच,चेतना एवं बर्ताव को बदल देती हैं यह  केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र पर अपना प्रभाव दिखाती हैं जिस कारण मनुष्य अपने चेतना के स्तर में वृद्धि पता है  यह मनोसक्रिय औषधियाँ वानस्पतिक रूप और रासायनिक संश्लेषित रूप यानि टेबलेट्स,केप्स्युल्स के रूपों में मिलती हैं वैध और अवैध रूप से इनका वैश्विक व्यपार होता है
हालांकि इन दवाओं का शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों प्रकार के विकारों के इलाज के लिए उपचारात्मक उद्देश्य से  इस्तेमाल किया जाता है परन्तु ये अपने मनोरंजक प्रयोग के लिए भी कुख्यात हैं। इन दवाओं की सदा के लिए  निर्भरता लत का कारण बन जाती है। मनोसक्रिय औषधियाँ  मनुष्य के मस्तिष्क की भावनात्मक स्तिथि पर गहरा प्रभाव डालती हैं जिस की बाद में आदत बन जाती है क्योंकि  मनोसक्रिय पदार्थ चेतना और मूड में व्यक्तिपरक परिवर्तन लाते हैं। इनके उपयोगकर्ता को कईं प्रकार के सुखद अनुभव जैसे उत्साह में वृद्धि या बढ़ी हुई सतर्कता जैसे कई मनो-अनुभव होते हैं स्वास्थ्य जोखिमों या नकारात्मक परिणामों के बावजूद भी इनका जरूरत से ज्यादा प्रयोग किया जाता है। 
मनोसक्रिय औषधियाँ को  उनके औषधीय प्रभाव के अनुसार तीन समूहों में विभाजित किया जा सकता है
१. उत्तेजक 
Stimulants
२. अवसादक 
Depressants
३. वीभ्राम्क या विभ्रम्कजनक 
Hallucinogenic
१.उत्तेजक:उत्तेजक मनोसक्रिय पदार्थ  कॉफी, तंबाकू, चाय, एम्फ़ैटेमिन, कोको, ब्राजील की औषधि गुअराना ,  एफीड्रा , खत, और कोका आदि उत्तेजक हैं  इस श्रेणी में शामिल पदार्थों दिमाग को उत्तेजित करते हैं जगाते हैं और उत्साह का कारण भी बनते है लेकिन यह दिमाग की धारणा को प्रभावित नहीं करते परन्तु शारीरिक प्रतिक्रियाओं को तेज कर देते हैं ।  
२.अवसादक:अवसादक मनोसक्रिय पदार्थ कोडीन,हेरोइन,एल्कोहल, बारबिट्यूरेट,फिनोबार्बीटल,सिकोनेल रेड्स,प्रशान्तक(वेलियम,लिब्रियम,रिस्प्रिन),कुछ वाष्पशील विलायक (पेंट,थिनर,कार्बनटेट्राक्लोराइड,बेंजीन,
टोलूइन)आदि,यह दिमाग की धारणा को कम प्रभावित करते हैं और शारीरिक प्रतिक्रियाओं को मंद कर देते हैं शराब, मस्तिष्क पर सीधे एक 'अवसादक' के रूप में प्रभाव के लिए सक्षम हैl यह मस्तिष्क के कार्य को धीमा कर देता हैl और उस व्यक्ति को झूठे अर्थ में विश्राम, या उनके अपराध, समस्याओं को अस्थायी तौर से बचने की अनूभूति देता है, मस्तिष्क शुन्य होने के कारण दर्द, अन्य विचार भी नहीं आते और मस्तिष्क के सामान्य निरोधात्मक नियंत्रण या विवेक की क्षति होती है l जिसके कारण अधिकांश लोग अधिक पीने पर नशे में धुत होकर उन्मुक्त बहक जाते हैं  l
३.वीभ्राम्क या विभ्रम्कजनक:ये वो पदार्थ हैं जो चेतना को गडबडाए बिना दिमागी जानकारी को विकृत कर देते हैं दिमागी धारणा बदल जाती है  l
मरिजुआना


इसके सेवन से मनुष्य दृढविश्वाश जैसी अवस्था में आ जाता है और वो ऊँचाई से कूद सकता है,वाहन के आगे आ सकता है,खुद को गोली मार सकता है 
दृढविश्वाश में वो 'कुछ नहीं बिगड़ सकता' जैसी अवस्था में आ जाता है
L.S.D.,मेस्कलिन,सीलोसायिबिन,भांग व भांग के अन्य उत्पाद चरस,गंजा,मरिजुआना,हशीश,हेम्प,अश्वगंधा आदि हैं 
यहाँ एक अन्य जिक्र भी जरूरी है 


मदात्यय या एल्कोहलिसम: शराब की लत का संकेत,शराब का एक अनिवार्य आभ्यासिक सेवन होता हैl यह ऐसे कि व्यक्ति द्वारा इस आदत को आसानी से छोड़ना संभव नहीं है, कभी कभी भी जब पीने के प्रतिकूल प्रभाव स्वास्थ्य, परिवार और सामाजिक जीवन को प्रभावित होना आरंभ हो जाता है तब भी यह नहीं छूट सकतीl 
शराब पीना सदा एक अभिशाप रहा है यह मूलतः इथाइल एल्कोहल है जो किण्वन से शर्करा से प्राप्त होता है मीथायल एल्कोहल का भी प्रयोग किया जाता है जो की अत्यंत विषैला है और इसके सेवन से मृत्यु और कम से कम अन्धपन तो हो ही जाता है मादक पेयों को सामान्यतः तीन सामान्य वर्गों में विभाजित किया जाता है: बीयर, वाइन और स्प्रिट्स, शराब उद्धिपक नहीं है बल्कि यह केन्द्रीय तंत्रिकातंत्र को दबाता है।यह शामक है और इसके अत्याधिक सेवन से तंत्रिकाशोथ हो जाता है।एक तरह  से यह भी विभ्रम्क ही है ।शराब के सेवन से यकृत सब से ज्यादा प्रभावित होता है और यह सिरोसिस रोग का कारण बनता है 

क्या एक व्यक्ति को उपचार के रूप मे मनोसक्रिय दवाओं लेना चाहिए?
यह व्यक्ति और विकार के प्रकार पर निर्भर करता है. यदि अवसाद या चिंता है तो एक महीने के लिए दवा लेने के बाद  फिर कभी आवश्यकता नहीं पड़ती है और यह भी महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति अपने चिकित्सक के दिशानिर्देशों का पालन करें 
यह कड़वा सच है कि आज पूरा विश्व इन ड्रग्स की चपेट मे है किशोर,युवा,वयस्क,बुजुर्ग,महिलायें भी चिंता,तनाव,कार्यभार,शौक आदि कारणों से ड्रग्स लेती हैं भारत मे भी कम आय वाले व्यक्ति कुछ सस्ते नशो की चपेट मे अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं आओ मिल-जुल कर इन नशों को अपने जीवन से दूर कर वास्तविक जीवन का आनंद लें 
    

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

क्यों है मूँगफली एक पौष्टिक भोजन? Why peanut is nutritious?

क्यों है मूंगफली एक पौष्टिक भोजन? Why  peanut is nutritious?
'गरीबों का काजू' के नाम से मशहूर मूँगफली काजू से ज्य़ादा पौष्टिक है परन्तु मूँगफली खाने वाले यह नहीं जानते,मूँगफली में सभी पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। मूँगफली खाकर हम अनजाने में ही इतने पोषक तत्व ग्रहण कर लेते हैं जिन का हमारे शरीर को बहुत फायदा होता है मूँगफली में प्रोटीन,वसा,शर्करा,विटामिन,खनिज,रुक्षांश प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं शोधों से ऐसा पता चला है कि मूँगफली में कैल्शियम और विटामिन डी अधिक मात्रा में होता है मूँगफली में प्रोटीन की मात्रा 25 प्रतिशत से भी अधिक होती हैमूंगफली में विटामिन ई का भंडारण होता है

आधे मुट्ठी मूगफली में 426 कैलोरीज़ होती हैं, 15 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है, 17 ग्राम प्रोटीन होता है और 35 ग्राम वसा होती है। इसमें विटामिन ई, के और बी6 भी प्रचूर मात्रा में होती है। यह आयरन, नियासिन, फोलेट, कैल्शियम और जि़ंक का अच्छा स्रोत हैं।

तुलनात्मक दृष्टि से मूँगफली का अध्ययन निम्न है,
इसमें प्रोटीन की मात्रा मांस की तुलना में 1.3 गुना, अण्डो से 2.5 गुना एवं फलो से 8 गुना अधिक होती हैं।
100 ग्राम कच्ची मूँगफली में 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन होता है । 
250 ग्राम भूनी मूँगफली में जितनी मात्रा में खनिज और विटामिन पाए जाते हैं, वो 250 ग्राम मांस से भी प्राप्त नहीं हो सकता है।
250 ग्राम मूँगफली के मक्खन से 300 ग्राम पनीर, 2 लीटर दूध या 15 अंडों के बराबर ऊर्जा की प्राप्ति आसानी से की जा सकती है।
एक अंडे के मूल्य के बराबर मूँगफलियों में जितनी प्रोटीन व ऊष्मा होती है, उतनी दूध व अंडे से संयुक्त रूप में भी नहीं होती।

मूँगफली  के लाभ :

पौष्टिकता से भरपूर मूँगफली में कैंसर प्रतिरोधी तथा कॉलेस्ट्रॉल कम करने की क्षमता है।

इसका संबंध ह्रदय की बीमारियों को घटाने में भी महत्वपूर्ण है।

कच्ची मूँगफली रोज खाने से नवजातक माताओं के दूध में वृद्धि होती है।

यह पाचन शक्ति को बढ़ाती है।
मूँगफली या उससे निर्मित खाद्य सामग्री के उपयोग से रक्त स्त्राव की बीमारी में आराम मिलता है।

भुनी मूँगफली एण्टीआक्सिडेंट्स का अच्छा स्रोत है।

बिना नमक वाली मूँगफली में मोनोसैचुरेटेड वसा बहुत अधिक मात्रा में होती है और यह स्वस्थ धमनियों के लिए अच्छी होती है। धमनियों को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो रक्त में कालेस्ट्रानल के स्तर को ठीक रखें।

मूँगफली  में विटामिन ई का भंडारण होता है और यह कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम करती है।
मूँगफली महिलाओं और पुरूषों में हार्मोन्स के विकास के लिए भी अच्छी  होती है।
शोधों से ऐसा पता चला है कि मूँगफली में कैल्शियम और विटामिन डी अधिक मात्रा में होता है और यह दांतों के स्वास्‍थ्‍य के लिए भी अच्छा होता है।
मूँगफली के बारे में ओर रोचक बाते :

मूँगफली एक अखरोट यानि की नट नहीं है लेकिन एक फली नस्ल से संबंधित जरूर है 
फाइटोस्टेरॉल (phytosterols)
मूँगफली में किसी भी अन्य नट की तुलना में अधिक प्रोटीन, नियासिन, फोलेट और फाइटोस्टेरॉल (phytosterols) पादपरसायन होता है
मूँगफली में अंगूर,अंगूर का रस, हरी चाय, टमाटर, पालक, ब्रोकोली, गाजर से अधिक उच्च एंटीऑक्सीडेंट क्षमता है
मूँगफली  चार प्रकार की होती हैं -रनर, वर्जीनिया, स्पेनिश, और वालेंसिया

मूँगफली  सितंबर और अक्टूबर में नयी आ जाती है

फसल रोपण विधि से लगाई जाती है मूँगफली का विकास चक्र 120 से 160 दिन या पाँच महीने होता है


मूँगफली का मक्खन 
मूँगफली और मूँगफली का मक्खन 30 में अधिक आवश्यक पोषक तत्वों और फाइटोन्युट्रीयेंट्स   phytonutrients होते हैं
मूँगफली स्वाभाविक रूप से कोलेस्ट्रॉल मुक्त हैं
मूँगफली का पौधा मूल रूप से दक्षिण अमेरिका में जन्मा है मूँगफली का पौधा छोटे छोटे पीले फूल पैदा करता है
एक परिपक्व मूँगफली का पौधे में 40 फली (Pods) होती है यानी एक पोधा 40 मूँगफली पैदा करता है
नियासिन (Niacin) एक महत्वपूर्ण विटामिन बी  है जोकि  भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने में मदद करता है मूँगफली नियासिन का एक बहुत अच्छा स्रोत माना जाता  है
फोलेट (Folate) 
फोलेट (Folate) कोशिका विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिसका अर्थ है कि पर्याप्त फोलेट का सेवन गर्भावस्था और बचपन के दौरान जब ऊतक तेजी से बढ़ रहे हैं तब विशेष रूप से महत्वपूर्ण है मूँगफली फोलेट का एक अच्छा स्रोत  है
 एंटीऑक्सिडेंट के रूप में मूँगफली .....
विटामिन ई एक बेहतरीन आहार एंटीऑक्सिडेंट होता है कि आक्सिजनित तनाव,  हानिकारक शारीरिक प्रक्रिया से कोशिकाओं की रक्षा में मदद करता  है
मूँगफली विटामिन ई  का एक अच्छा स्रोत  है

रेशा फाइबर का पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान  है. मूँगफली फाइबर का एक अच्छा स्रोत है

मोनोअनसेचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड दोनों प्रकार की वसा एक स्वस्थ आहार के लिए योगदान स्वरूप है मूँगफली  और मूँगफली के मक्खन के एक बार के आहार में 4.5 ग्राम पॉलीअनसेचुरेटेड वसा और 8 ग्राम मोनोअनसेचुरेटेड वसा शामिल होती है

मूँगफली शरीर में गर्मी पैदा करती है, इसलिए सर्दी के मौसम में ज्यादा लाभदायक है। यह खाँसी में उपयोगी है व मेदे और फेफड़े को बल देती है। 
भोजन के बाद यदि 50 या 100 ग्राम मूँगफली प्रतिदिन खाई जाए तो सेहत बनती है, भोजन पचता है, शरीर में खून की कमी पूरी होती है।
इसे भोजन के साथ सब्जी, खीर, खिचड़ी आदि में डालकर नित्य खाना चाहिए। मूँगफली में तेल का अंश होने से यह वायु की बीमारियों को भी नष्ट करती है। 
सर्दियों में त्वचा में सूखापन आ जाता है। जरा सा मूँगफली का तेल, दूध और गुलाब जल मिलाकर मालिश करें। बीस मिनट बाद स्नान कर लें। इससे त्वचा का सूखापन ठीक हो जाएगा 
मुट्ठीभर भुनी मूँगफलियाँ निश्चय ही पोषक तत्वों की दृष्टि से लाभकारी हैं। 
तो देखा कितने गुण हैं मूँगफली में .....
आओ इसे अपने आहार का एक मुख्य भाग बनाएँ और इस के बेहतरीन गुणों का लाभ उठायें